अमेरिका जाने का प्लान हो सकता है फेल, ट्रंप की टीम ने US वीजा इंटरव्यू पर दुनिया भर में लगाई रोक

ट्रंप प्रशासन की ओर से लगातार प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. अब अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया है कि दुनिया भर के सभी दूतावासों में वीजा अपॉइंटमेंट पर रोक लगा दी गई है.

AI
Shanu Sharma

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के शुरूआत में ही इमिग्रेंट्स को लेकर अपने इरादे साफ जाहिर किए थे. उन्होंने साफ कहा था कि किसी भी हाल में अब अवैध प्रवासियों को अमेरिका में जगह नहीं मिलेगी. इसके बाद उन्होंने अप्रवासियों को डिपोर्ट करना शुरू कर दिया और कुछ सख्त नियम भी लागू किए. जिनमें से H-1B वीजा भी शामिल है.

ट्रंप सरकार ने अब एक नया फैसला लिया है. उन्होंने दुनिया भर के सभी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में वीजा अपॉइंटमेंट पर रोक लगा दी है या फिर उसके समय में बदलाव किया है. हालांकि अमेरिका की ओर से इसके पीछे ग्लोबल ट्रेनिंग प्रोग्राम कारण बताया गया है.

अमेरिकी विदेश विभाग ने दी जानकारी

अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से इस बात की जानकारी देते हुए कहा गया कि अभी वीजा सेवाओं को इसलिए रोक दिया गया ताकि सभी विदेशी राजनयिक पोस्ट पर ग्लोबल ट्रेनिंग प्रोग्राम को लागू किया जा सके. हालांकि ऐसा कब तक चलेगा इस बात की कोई खास जानकारी साझा नहीं की गई है.


साथ ही उन्होंने इस ट्रेनिंग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि वीजा आवेदकों का मूल्यांकन व्यापक और समान तरीके से हो. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि प्रवासियों की वजह से अमेरिकी नागरिकों को सही अवसर नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने इमिग्रेशन को रोकने के लिए सख्त अभियान चलाया. जिसके तहत कई ग्रीन कार्ड को भी रद्द कर दिए गए और आवेदनों को खारिज भी किया गया.

दो लाख वीजा रद्द करने की तैयारी

मिल रही जानकारी के मुताबिक ट्रंप सरकार आने वाले समय में लगभग दो लाख वीजा को रद्द करने की तैयारी में है. उनका मानना है कि ये वो लोग हैं जो अमेरिका घूमने पहुंचे थे लेकिन यहां शरण के लिए आवेदन देकर ज्यादा समय रुकने की कोशिश कर रहे हैं. उनका मानना है कि ऐसा करने से अमेरिकी नागरिकों को ज्यादा मौका तो मिलेगा ही, साथ ही घरेलू सुरक्षा के लिए भी बेहतर होगा. ट्रंप प्रशासन के इन नीतियों का लगातार मानवाधिकार समूहों द्वारा विरोध किया जा रहा है. उन्होंने इन अभियानों की निंदा करते हुए इसे भेदभावपूर्ण और अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ बताया है. साथ ही उनका मानना है कि सरकार द्वारा उठाए जा रहे ऐसे कदम की वजह से अमेरिकी में रहने वाले विदेशी नागरिकों की सुरक्षा खतरे में आ गई है और नस्लीय आधार पर अपराध बढ़ रहे हैं.