25 लाख का एक बंदर, आखिर चीन में ऐसा क्या हुआ कि मोटी रकम देने पर भी नहीं मिल रहे मकॉक?

चीन में मेडिकल रिसर्च में इस्तेमाल होने वाले मकॉक बंदरों की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. एक मकॉक की कीमत 1.8 लाख युआन यानी करीब 25.58 लाख रुपये हो गई है.

ChatGpt
Reepu Kumari

नई दिल्ली: चीन में इन दिनों मेडिकल रिसर्च में इस्तेमाल होने वाले मकॉक बंदरों की कीमतों ने वैज्ञानिकों और बायोटेक उद्योग की चिंता बढ़ा दी है. हालात ऐसे हैं कि एक मकॉक बंदर की कीमत करीब 25.58 लाख रुपये तक पहुंच गई है. केवल कीमत ही नहीं, बल्कि मांग इतनी बढ़ चुकी है कि कई शोध संस्थानों को भारी रकम देने के बाद भी बंदर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं. इसका सीधा असर नई दवाओं के विकास और वैज्ञानिक अनुसंधानों पर पड़ने लगा है. चीन की कई प्रयोगशालाओं में चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि समस्या केवल महंगे दाम की नहीं, बल्कि मकॉक बंदरों की लगातार घटती उपलब्धता की भी है.

मेडिकल रिसर्च के लिए बढ़ी रिकॉर्ड मांग

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, गुआंगझोउ स्थित जिनान यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक गुओ शियांगयू लंबे समय से दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों पर शोध कर रहे हैं. उनकी लैब में हर साल 30 से 50 मकॉक बंदरों की जरूरत होती है. लेकिन चीनी नव वर्ष के बाद इनकी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे रिसर्च प्रभावित होने लगी है.

कीमत बढ़ी, लेकिन उपलब्धता घटी

रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में एक मकॉक बंदर की कीमत 1.8 लाख युआन यानी लगभग 25.58 लाख रुपये तक पहुंच गई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि कई बार इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी बंदर नहीं मिलते. इसकी वजह यह है कि खरीदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि आपूर्ति सीमित होती जा रही है.


आखिर मकॉक बंदर ही क्यों हैं पहली पसंद?

वैज्ञानिकों के अनुसार, मकॉक बंदरों की जैविक संरचना और डीएनए इंसानों से काफी हद तक मेल खाते हैं. इसी कारण नई दवाओं और जैविक उपचारों के शुरुआती परीक्षणों में इनका उपयोग किया जाता है. दवाओं के प्रभाव और सुरक्षा का मूल्यांकन करने के लिए इन्हें महत्वपूर्ण मॉडल माना जाता है.

मेडिसिन हब बनने की रणनीति पर असर

चीन ने हाल के वर्षों में बायोटेक और फार्मा सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश किया है. कैंसर, मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग और ऑटोइम्यून बीमारियों की नई दवाएं विकसित करने के लिए देशभर की प्रयोगशालाओं में रिसर्च चल रही है. लेकिन मकॉक बंदरों की कमी इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने नई चुनौती बनती दिखाई दे रही है.

आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है चुनौती

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2025 से 2027 के बीच चीन की प्रयोगशालाओं के लिए हर साल केवल 49 हजार से 52 हजार मकॉक बंदर ही उपलब्ध हो पाएंगे. यदि मांग इसी गति से बढ़ती रही तो वैज्ञानिक अनुसंधान और नई दवाओं के परीक्षण पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है. फिलहाल, बढ़ती कीमत और सीमित उपलब्धता चीन के बायोटेक क्षेत्र के लिए बड़ी चिंता बन चुकी है.