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अमेरिका से छुपकर कौन कर रहा है जंग में ईरान की मदद? हथियारों ने खोली पोल! राष्ट्रपति ट्रंप ने दी चेतावनी

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया है कि चीन ईरान को कंधे से दागे जाने वाले नए एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम (MANPADS) भेजने की तैयारी कर रहा है.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली:  मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है. आज पूरी दुनिया की नजर इस्लामाबाद में होने वाले शांतिवार्ता पर टिकी है. इस बीच कुछ ऐसा निकल कर आया है जिससे सब हैरान हैं. दुनिया के मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में यूएस खूफिया एंजेंसी ने एक बड़ा दावा किया है. रिपोर्टों के अनुसार चीन ईरान को आधुनिक MANPADS मिसाइल सिस्टम पहुंचाने की योजना बना रहा है. एक तरफ चीन खुद को अमेरिका-ईरान के बीच शांति स्थापित करने वाला मध्यस्थ बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह ईरान की सैन्य क्षमता को चुपके से मजबूत करने में लगा है. यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा रही है.

F-15 जेट हमले में चीनी मिसाइल का संदेह

पिछले हफ्ते ईरान ने अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया था. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि इसमें हैंडहेल्ड हीट-सीकिंग मिसाइल का इस्तेमाल हुआ. यदि यह मिसाइल चीनी बनी हुई है तो बीजिंग की प्रत्यक्ष संलिप्तता साफ हो जाएगी.

ट्रंप की बीजिंग यात्रा पर साया

राष्ट्रपति ट्रंप अगले महीने शी जिनपिंग से बीजिंग में मिलने वाले हैं. ठीक इसी समय चीन ईरान को हथियार भेजकर युद्धविराम का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है. यदि अमेरिका को ठोस प्रमाण मिले तो ट्रंप-शी वार्ता बेहद तनावपूर्ण हो सकती है और नए आर्थिक प्रतिबंध लग सकते हैं.

चीन का साफ इनकार

चीनी दूतावास ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और सनसनीखेज बताया है. चीन का कहना है कि वह केवल रक्षात्मक हथियारों की बात कर रहा है. लेकिन अमेरिकी रिपोर्ट में साफ है कि ये मिसाइलें कम ऊंचाई वाले हेलीकॉप्टर और जेट्स के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं.

तेल निर्भरता और रणनीतिक खेल

चीन ईरान के तेल पर काफी निर्भर है, इसलिए वह तेहरान को अकेला नहीं छोड़ सकता. तीसरे देशों के जरिए हथियार भेजकर चीन बाद में तटस्थ होने का दावा कर सकेगा, जबकि असल में ईरान की रक्षा क्षमता को गुप्त रूप से बढ़ावा दे रहा है.

रूस-चीन की दोतरफा मदद

ईरान को अब दो मोर्चों से समर्थन मिल रहा है. रूस खुफिया जानकारी दे रहा है तो चीन हथियार सप्लाई की तैयारी कर रहा है. इससे ईरान अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता हासिल कर रहा है.