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PM मार्क कार्नी के भारत दौरे से पहले कनाडा का बड़ा कदम, तहव्वुर राणा की नागिरकता को लेकर बड़ी कार्रवाई की तैयारी

कनाडा ने तहव्वुर हुसैन राणा की नागरिकता रद्द करने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की है. यह कदम PM मार्क कार्नी के भारत दौरे से पहले और आपसी रिश्तों को फिर से ठीक करने की कोशिशों के बीच उठाया गया है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: कनाडा सरकार ने कथित तौर पर 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राणा की नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी है. यह कदम कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के 26 फरवरी को भारत दौरे से पहले उठाया गया है क्योंकि ओटावा पिछली जस्टिन ट्रूडो सरकार के तहत खराब हुए नई दिल्ली के साथ संबंधों को फिर से ठीक करना चाहता है.

पाकिस्तान में जन्मे बिजनेसमैन तहव्वुर हुसैन राणा फिलहाल भारत में कस्टडी में हैं, जहां वह पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा द्वारा किए गए मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े आरोपों पर ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं. 2008 के हमले में आतंकवादियों ने 160 से ज्यादा लोगों को मार डाला था.

पहली बार कब गए थे कनाडा?

कनाडा के पब्लिकेशन ग्लोबल न्यूज ने बताया कि इमिग्रेशन, रिफ्यूजी और सिटिजनशिप कनाडा यानी IRCC ने राणा को बताया है कि वह 2001 में मिली कनाडाई नागरिकता छीनना चाहता है. 65 साल के राणा 1997 में कनाडा आए थे.

कनाडा के इस कदम के पीछे का क्या है कारण?

कनाडा सरकार का राणा की नागरिकता रद्द करने का कदम कथित तौर पर उनके खिलाफ आतंकवाद के आरोपों पर आधारित नहीं है. अपने नोटिस में IRCC ने कहा कि राणा को गलत जानकारी के आधार पर नागरिकता दी गई थी. डिपार्टमेंट ने आरोप लगाया कि उन्होंने 2000 में नागरिकता के लिए अप्लाई करते समय कनाडा में अपने रहने के बारे में गलत जानकारी दी थी.

IRCC की रिपोर्ट में क्या आया सामने?

IRCC की रिपोर्ट के मुताबिक राणा ने दावा किया कि वह अपने अप्लाई करने से पहले चार साल तक ओटावा और टोरंटो में रहे थे और उस दौरान देश से सिर्फ छह दिन की गैरहाजिरी बताई. लेकिन रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस यानी RCMP की जांच में पता चला कि उसने ज्यादातर समय शिकागो में बिताया था, जहां उसकी कई प्रॉपर्टी थीं और वह एक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी और एक किराने की दुकान सहित कई बिजनेस चलाता था.

डिपार्टमेंट ने क्या लगाया आरोप?

डिपार्टमेंट ने उस पर एक गंभीर और जानबूझकर धोखा देने का आरोप लगाया, जिसमें कहा गया कि लंबे समय तक गैरहाजिरी न बताने की वजह से अधिकारियों ने गलत नतीजा निकाला कि वह कैनेडियन नागरिकता के लिए योग्य है. 31 मई 2024 के एक लेटर में IRCC ने राणा को बताया कि उसकी कही गई गलत जानकारी ने फैसले लेने वालों को नागरिकता देने में गुमराह किया, जबकि ऐसा लग रहा था कि वह एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा नहीं करता था.

यह मामला अब फेडरल कोर्ट ऑफ कनाडा को भेज दिया गया है, जिसके पास यह तय करने का आखिरी अधिकार है कि नागरिकता गलत जानकारी धोखाधड़ी या जरूरी बातें छिपाकर हासिल की गई थी या नहीं.