कनाडा ने खालिस्तानी उग्रवाद को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया, जानें पूरा मामला
कनाडा की इंटेलीजेंस एजेंसी सीएसआईसी ने 2025 की रिपोर्ट में खालिस्तानी उग्रवादियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। भारत- कनाडा संबंधों पर भी असर पड़ना तय।
कनाडा की खुफिया एजेंसी कनेडियन सिक्योरिटी इंटेलीजेंस सर्विस (सीएसआईएस) ने खालिस्तानी चरमपंथियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया है. एजेंसी की 2025 की सार्वजनिक रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा में सक्रिय कुछ खालिस्तानी तत्व हिंसक गतिविधियों में शामिल हैं और यह खतरा लगातार बना हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा आधारित खालिस्तानी चरमपंथियों (CBKE) की गतिविधियां न केवल कनाडा बल्कि उसके हितों के लिए भी खतरा हैं. एजेंसी ने यह भी कहा है कि इन तत्वों के कुछ सदस्य कनाडाई नागरिकों और संस्थानों से जुड़े हैं, जिनका इस्तेमाल वे अपने हिंसक एजेंडे को बढ़ावा देने और फंड जुटाने के लिए करते हैं.
संस्थानों के दुरुपयोग का आरोप
सीएसआईएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कुछ चरमपंथी समूह कनाडा के संस्थानों का सहारा लेकर आम लोगों से धन इकठ्ठा करते हैं, जिसे बाद में हिंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करते हैं. हालांकि एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि खालिस्तान के समर्थन में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अभियान चलाना चरमपंथ की श्रेणी में नहीं आता.
एयर इंडिया 182 का जिक्र
रिपोर्ट में एयर इंडिया फ्लाइट 182 बोम्बिंग का भी जिक्र किया गया है, जिसे कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया गया है. इस हमले में 329 लोगों की जान गई थी। इनमें अधिकांश कनाडाई नागरिक थे.
भारत में अलगाववाद से जुड़ा मुद्दा
खालिस्तानी समूह भारत में एक अलग देश की मांग करते हैं और भारत ने इन्हें आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल कुछ ही लोग ऐसे हैं तो कनाडा को आधार बनाकर भारत में हिंसक गतिविधियों की योजना पर काम करते हैं. 2023 में कनाडा के तत्काली प्रधानमंत्री जस्टिन टुडो ने कनाडा में खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संभावित संलिप्तता का आरोप लगाया था, हालांकि भारत ने इसे नकार दिया था. हालांकि मौजूदा प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में भारत-कनाडा संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिशें जारी हैं.
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