अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए मलेशिया जाएंगे तारिक रहमान, जानें बांग्लादेशी PM की भारत को लेकर क्या है प्लानिंग
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा पर मलेशिया जाएंगे और उसके बाद चीन का दौरा करेंगे. चलिए जानते हैं भारत दौरे को लेकर क्या है उनकी प्लानिंग.
नई दिल्ली: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए मलेशिया रवाना होने वाले हैं. इसके बाद वह चार दिवसीय चीन दौरे पर जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से होगी. इस फैसले को बांग्लादेश की नई विदेश नीति के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
आमतौर पर दक्षिण एशिया के देशों में नई सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री की पहली विदेश यात्रा भारत या चीन की ओर होती है लेकिन तारिक रहमान ने अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के लिए मलेशिया को चुना है. बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मलेशिया दौरे के दौरान व्यापार, निवेश, ऊर्जा और सेमीकंडक्टर उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी.
मलेशिया दौरे के बाद क्या है प्लानिंग?
मलेशिया दौरे के बाद रहमान चीन पहुंचेंगे, जहां वह विश्व आर्थिक मंच (WEF) से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के अनुसार करीब 17 द्विपक्षीय समझौतों पर चर्चा चल रही है.
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इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू तीस्ता नदी परियोजना मानी जा रही है. तीस्ता नदी के प्रबंधन, ड्रेजिंग और तटबंध निर्माण को लेकर चीन और बांग्लादेश के बीच बातचीत हो सकती है. इसके अलावा मोंगला बंदरगाह के विकास पर भी चर्चा होने की संभावना है.
तीस्ता परियोजना का क्या है महत्व?
तीस्ता परियोजना भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व रखती है क्योंकि यह भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर क्षेत्र के करीब स्थित है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में इस परियोजना को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच सहमति बनी थी, लेकिन राजनीतिक बदलाव के बाद यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई.
भारत की ओर से कैसा रहा संबंध?
भारत ने भी नई सरकार बनने के बाद तारिक रहमान को आधिकारिक दौरे का निमंत्रण दिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव जीतने पर उन्हें बधाई दी थी और शपथ ग्रहण समारोह में भारत की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भेजा गया था. हालांकि अब तक रहमान ने भारत यात्रा को लेकर कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है.
विश्लेषकों का मानना है कि मलेशिया को पहली यात्रा के लिए चुनकर रहमान ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि उनकी सरकार किसी एक शक्ति केंद्र की ओर झुकाव दिखाने के बजाय बांग्लादेश फर्स्ट नीति अपनाना चाहती है. वहीं भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है.