Budget 2026

बीएलए का 'हेरोफ 2', पाकिस्तान की धरती पर छिड़ी जंग; कैसे दांव पर लगे हैं चीन और अमेरिका के अरबों डॉलर?

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा 'हेरोफ 2' के तहत किए गए भीषण हमलों ने पाकिस्तान को दहला दिया है. इन हमलों ने चीन और अमेरिका के आर्थिक हितों के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौतियां पेश कर दी हैं.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में शनिवार को हुआ आतंकी हमला हालिया दशकों की सबसे भीषण घटना बनकर उभरा है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक साथ कई ठिकानों को निशाना बनाकर अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है. इस हमले में न केवल सुरक्षा बलों बल्कि निर्दोष नागरिकों को भी भारी कीमत चुकानी पड़ी है. यह हिंसा केवल स्थानीय अशांति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में निवेश कर रहे वैश्विक दिग्गजों चीन और अमेरिका के लिए भी एक सीधा खतरा है.

बीएलए ने इस समन्वित हमले को 'हेरोफ 2' यानी 'काला तूफान' का नाम दिया है. यह ऑपरेशन पिछले साल के 'हेरोफ 1' के मुकाबले कहीं अधिक व्यापक और घातक साबित हुआ. विद्रोहियों ने क्वेटा से लेकर ग्वादर तक पूरे प्रांत में एक साथ आत्मघाती धमाके और अंधाधुंध गोलीबारी की. मस्तंग में जेल पर धावा बोलकर कैदियों को छुड़ाया गया और कई प्रमुख राजमार्गों को घंटों तक बंद रखा गया. इस रणनीति ने पूरे प्रांतीय प्रशासनिक तंत्र को कुछ समय के लिए पंगु बना दिया.

हताहतों के आंकड़ों पर विरोधाभास 

इस खूनी संघर्ष में मरने वालों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कुल मौतों का आंकड़ा 200 तक पहुंच गया है, जिनमें 31 नागरिक और 17 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं. पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसने जवाबी कार्रवाई में 145 विद्रोहियों को ढेर कर दिया है. दूसरी ओर, बीएलए के प्रवक्ता ने इन दावों को नकारते हुए कहा कि उनके केवल सात लड़ाके मारे गए हैं, जबकि उन्होंने 84 सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया है.

विदेशी निवेश पर मंडराता संकट 

बलूचिस्तान प्राकृतिक गैस, कोयला और सोने जैसे दुर्लभ खनिजों के विशाल भंडार से समृद्ध है. अमेरिका ने हाल ही में रेको डिक परियोजना में 1.25 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है. इसी तरह, चीन अपने महत्वाकांक्षी सीपीईसी प्रोजेक्ट के माध्यम से यहाँ भारी पूंजी लगा रहा है. विदेश नीति विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन के अनुसार, ये हमले उन निवेशकों के लिए एक बड़ी चेतावनी हैं जो यहाँ के संसाधनों में रुचि रखते हैं. बीएलए का मुख्य विरोध बाहरी शक्तियों द्वारा संसाधनों के शोषण को लेकर है.

रणनीतिक और भौगोलिक महत्व बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जिसकी सीमाएं ईरान और अफगानिस्तान से सटी हैं. इसकी अरब सागर तक सीधी पहुँच इसे वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण द्वार बनाती है. ग्वादर बंदरगाह चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का एक अभिन्न हिस्सा है, जो उसे मध्य पूर्व से जोड़ता है. इस क्षेत्र की अस्थिरता न केवल पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डालती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संपर्क मार्गों के लिए भी एक बड़ा अवरोध पैदा करती है.