एपस्टीन फाइल्स में ट्रंप से जुड़े दस्तावेजों पर मचा बवाल, अचानक गायब होने और फिर से अपलोड होने से बढ़ा शक

एपस्टीन फाइलों में ट्रंप का नाम आया है, लेकिन जस्टिस डिपार्टमेंट के अनुसार आरोप बेबुनियाद हैं. फाइलों को हटाने और फिर से अपलोड करने से यह विवाद और बढ़ गया है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: जेफरी एपस्टीन से जुड़े मामले ने एक बार फिर न सिर्फ अमेरिका बल्कि ब्रिटेन की राजनीतिक और कारोबारी दुनिया में भी हलचल मचा दी है. अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार को एपस्टीन मामले से जुड़े 3 मिलियन से ज्यादा डॉक्यूमेंट्स जारी करने की घोषणा की. 

इसे अब तक का सबसे बड़ा डॉक्यूमेंट डंप माना जा रहा है, हालांकि, न्याय विभाग ट्रंप से जुड़ी फाइलों को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है. द टेलीग्राफ ने बताया कि एक बहुत ही संवेदनशील फाइल को कुछ ही घंटों में वेबसाइट से हटा दिया गया और बाद में फिर से अपलोड कर दिया गया. इस फाइल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर यौन उत्पीड़न के बिना वेरिफाई किए गए आरोप थे, जिससे सोशल मीडिया और राजनीति में हंगामा मच गया. 

अमेरिकी डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जारी किए गए कुल डॉक्यूमेंट्स में लगभग 2,000 वीडियो और 180,000 से ज्यादा तस्वीरें शामिल हैं. हालांकि, इन डॉक्यूमेंट्स के कई हिस्सों को प्राइवेसी और कानूनी कारणों से ब्लैक किया गया है.

न्याय विभाग और व्हाइट हाउस ने क्या कहा?

इन फाइलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सैकड़ों बार आया है. हालांकि, न्याय विभाग और व्हाइट हाउस दोनों ने साफ किया है कि इसमें शामिल कई आरोप बिना सबूत के हैं और उनका कोई कानूनी आधार नहीं है. जिस डॉक्यूमेंट को कुछ समय के लिए हटाया गया था, उसमें अगस्त 2025 में FBI द्वारा तैयार की गई एक लिस्ट शामिल थी. 

यह लिस्ट FBI के नेशनल थ्रेट ऑपरेशंस सेंटर को मिली शिकायतों पर आधारित थी और इसमें डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ कई गंभीर लेकिन बिना वेरिफाई किए गए आरोप थे. सबसे गंभीर आरोप यह था कि ट्रंप ने लगभग तीन दशक पहले न्यू जर्सी में एक 13 या 14 साल की लड़की को सेक्शुअल एक्ट के लिए मजबूर किया था. यह दावा कथित पीड़ित की एक 'अज्ञात महिला दोस्त' ने किया था. डॉक्यूमेंट्स में यह भी कहा गया है कि इस जानकारी को स्वतंत्र रूप से वेरिफाई नहीं किया गया था.

फाइल को हटाने के बाद अपलोड करने की क्या है वजह?

न्याय विभाग ने ब्रिटिश अखबार को बताया कि संबंधित डॉक्यूमेंट को वेबसाइट पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक के कारण अस्थायी रूप से हटा दिया गया था और अब यह वापस ऑनलाइन आ गया है. हालांकि, तब तक, ये आरोप सोशल मीडिया पर पहले ही बड़े पैमाने पर चर्चा में आ चुके थे. डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने स्वीकार किया कि इतनी बड़ी संख्या में डॉक्यूमेंट्स की समीक्षा करने में गलतियां हो सकती हैं और किसी भी एडिटिंग की गलतियों को तुरंत ठीक किया जाएगा.