शी जिनपिंग का 7 साल बाद भारत आगमन, क्या बदलेगी चीन के साथ आर्थिक रिश्तों की तस्वीर?
BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचेंगे. उनकी यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं. करीब सात साल बाद उनकी भारत यात्रा हो रही है. 2020 में गलवान घाटी झड़प के बाद दोनों देशों के बीच दूरी आई थी, जिसे अब कम करने की कोशिश की जा रही है.
राजनयिक रिश्तों में तनाव के बावजूद भारत और चीन के बीच व्यापारिक जुड़ाव लगातार बना हुआ है. ऐसे में शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने पर खास ध्यान रहने की संभावना है. भारत की प्राथमिकता यह होगी कि रिश्तों में सुधार का सीधा लाभ भारतीय उद्योग और कंपनियों को मिले.
112 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार घाटा
भारत के सामने चीन के साथ व्यापार असंतुलन सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने चीन से करीब 131.6 अरब डॉलर का सामान आयात किया, जबकि चीन को भारत का निर्यात लगभग 19.5 अरब डॉलर रहा. इस तरह भारत का व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर से अधिक रहा. हालिया आंकड़े भी इसी असंतुलन की ओर इशारा करते हैं. जुलाई में चीन से भारत का आयात 34.4 प्रतिशत बढ़कर 14.67 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि चीन को निर्यात 64.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.20 अरब डॉलर रहा.
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कई जरूरी सामानों के लिए चीन पर निर्भरता
भारत की चिंता सिर्फ व्यापार घाटे तक सीमित नहीं है. मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल सामान, रसायन, दवाओं के लिए जरूरी कच्चा माल और औद्योगिक उपकरणों के कई हिस्सों की आपूर्ति चीन से होती है. करीब 77.4 अरब डॉलर के ऐसे आयात हैं, जिनमें भारत की कुल विदेशी खरीद में चीन की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है. यही कारण है कि भारत एक ओर व्यापार बढ़ाना चाहता है, तो दूसरी ओर किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता घटाने की रणनीति पर भी काम कर रहा है.
चीनी निवेश पर भी नजर
भारत-चीन संबंधों में सुधार की एक अहम कसौटी निवेश होगी. 2020 के बाद भारत ने पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश के नियम कड़े किए थे. हालांकि, मार्च 2026 में कुछ क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों की मंजूरी को आसान बनाने के लिए बदलाव किए गए. इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने की कोशिशों से चीन से निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. हालांकि, स्वामित्व और नियंत्रण से जुड़े सुरक्षा प्रावधान लागू रहेंगे.