कांग्रेस के कितने काम आएंगे बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट? समझिए चुनावी दंगल में उतरने के मायने

हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले पहलवान विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया शुक्रवार को कांग्रेस में शामिल हो गए.

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India Daily Live

हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले पहलवान विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया शुक्रवार को कांग्रेस में शामिल हो गए. दोनों पहलवानों ने हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद कहा जा रहा था कि दोनों  कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं. हरियाणा में 5 अक्टूबर को विधानसभा का चुनाव होना है.

कांग्रेस के लिए कितना फायदेमंद होगा यह दांव

बता दें कि विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया दोनों ही जाट समुदाय से आते हैं और हरियाणा में किसानों की एक बड़ी संख्या जाट समुदाय की है और हरियाणा का पूरा किसान समुदाय न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को लेकर पहले से ही बीजेपी के खिलाफ एकजुट है और हरियाणा में बीजेपी को हराने का मन बना चुका है.

जनाधार को बढ़ाने पर फोकस

फोगाट और पुनिया दोनों को अपने पाले में मिलाकर कांग्रेस राज्य में अपने जाट समुदाय के वोट को मजबूत करने के साथ-साथ  महिलाओं, खिलाड़ियों  और युवाओं में अपने जनाधार को बढ़ाना चाहती है.

कहां से पर्चा भरेंगी विनेश

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के हरियाणा इंचार्ज दीपक बाबरिया ने मंगलवार को कहा था कि फोगाट कहां से चुनाव लड़ेंगी इसका ऐलान जल्द किया जाएगा. उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस फोगाट को जुलाना या बादली से उम्मीदवार बना सकी है दोनों ही विधानसभा में जाटों की अच्छी खासी आबादी है. कांग्रेस ने फोगाट के लिए दादरी का भी विकल्प रखा है.

बृजभूषण सिंह को लेकर बीजेपी का घेराव

इसके साथ ही विनेश फोगाट पूर्व बीजेपी सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण सिंह के खिलाफ पहलवानों के आंदोलन का चेहरा रही हैं. कांग्रेस विनेश को सामने लाकर बृजभूषण सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने को लेकर बीजेपी को घेरने की भी कोशिश करेगी.

हरियाणा चुनाव में खिलाड़ियों का रिकार्ड
विनेश और पुनिया को पार्टी में शामिल कर कांग्रेस ने वर्तमान माहौल को देखते हुए हरियाणा चुनाव में थोड़ी बढ़त तो ले ली है लेकिन यहां गौर करने वाली बात ये है कि हरियाणा के चुनावों में खिलाड़ियों का प्रदर्शन कोई खास नहीं रहा है. इससे पहले पहलवान योगेश्वर दत्त और बबीता फोगाट को बीजेपी ने 2019 के चुनाव में क्रमश: बरोदा और चरखी दादरी से उम्मीदवार बनाया था लेकिन दोनों ही अपनी-अपनी सीट हार गए थे.

दत्त की नजरें इस बार गोहाना सीट पर हैं. खिलाड़ियों में केवल भारतीय हॉकी के पूर्व कप्तान संदीप सिंह ने ही पहोवा से जीत का स्वाद चखा है. उन्हें मनोहर लाल खट्टर सरकार में खेल मंत्री बनाया गया था लेकिन यौन शोषण के आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें खेल मंत्री के पद से हटा दिया था.

अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर रहे विजेंदर सिंह ने भी साल 2019 में कांग्रेस के टिकट पर साउथ दिल्ली से लोकसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन वे चुनाव हार गए थे. इसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था. कहा जा रहा है कि विजेंदर सिंह भी इस बार चुनाव में हाथ आजमा सकते हैं.