संविधान संशोधन पर तेज हुआ नंबर गेम, NDA की नजर अब DMK और JMM पर!

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर लोकसभा का गणित बदलता दिख रहा है. एनसीपी (शरद पवार गुट) के समर्थन के संकेत से सरकार दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच गई है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर आगामी मानसून सत्र में जोरदार बहस होने की संभावना है. इस बीच एनसीपी (शरद पवार गुट) की ओर से विधेयक के समर्थन के संकेत मिलने के बाद संसद का राजनीतिक समीकरण बदलता नजर आ रहा है. सरकार पहले की तुलना में जरूरी बहुमत के और करीब पहुंच गई है. अब सभी की नजर कुछ प्रमुख क्षेत्रीय दलों के रुख पर टिकी हुई है.

यदि एनसीपी (शरद पवार गुट) के आठ सांसद विधेयक के पक्ष में मतदान करते हैं तो सरकार के समर्थन में सांसदों की संख्या 332 तक पहुंच सकती है. हालांकि 543 सदस्यीय लोकसभा में संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत के हिसाब से अभी भी 362 सांसदों का समर्थन जरूरी माना जाता है.

पहले क्यों अटक गया था विधेयक?

17 अप्रैल को हुए मतदान में सरकार को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया था. उस समय विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे. कुल 528 सांसदों ने मतदान किया था. विधेयक पारित कराने के लिए उस समय 352 मतों की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी.


तीन महीने में बदला राजनीतिक गणित

पिछले कुछ महीनों में लोकसभा की संख्या में बदलाव आया है. टीएमसी से अलग हुए सांसदों और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के कुछ सांसदों के दूसरे खेमे में जाने के बाद सरकार का समर्थन बढ़ा है. इसी बदलाव के चलते अब विधेयक को लेकर सरकार पहले की तुलना में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है.

डीएमके की भूमिका पर टिकी नजर

अब सबसे अधिक चर्चा डीएमके के रुख को लेकर है. पहले इस दल ने विधेयक का विरोध किया था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उसके रुख को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही हैं. यदि डीएमके समर्थन करता है या मतदान से दूरी बनाता है तो बहुमत का गणित बदल सकता है.

छोटे दल भी बन सकते हैं निर्णायक

झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत कुछ छोटे दलों का रुख भी इस विधेयक के भविष्य में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सरकार को उम्मीद है कि विभिन्न दलों के समर्थन या अनुपस्थिति की स्थिति में आवश्यक बहुमत जुटाया जा सकता है. अब अंतिम तस्वीर मानसून सत्र के दौरान होने वाली चर्चा और मतदान के बाद ही साफ होगी.