आखिर इंफाल एयरपोर्ट के पास दिखा 'UFO' कहां गायब हो गया, क्या वो चीन का जासूसी गुब्बारा था?
सोशल मीडिया पर जो वीडियोज सामने आए हैं, उसमें एयरपोर्ट के पास आसमान में दिखने वाली वस्तु बिलकुल उसी तरह है, जैसा कि इसी साल फरवरी में अमेरिका में देखा गया था.
UFO sighted near Imphal airport was Chinese spy balloon: मणिपुर में इंफाल एयरपोर्ट के पास 'यूएफओ' आखिर कहां गायब हो गया? क्या एयरपोर्ट के पास यूएफओ जैसी दिखने वाली वस्तु चीन का जासूसी गुब्बारा था? सोशल मीडिया पर जो वीडियोज सामने आए हैं, उसमें एयरपोर्ट के पास आसमान में दिखने वाली वस्तु बिलकुल उसी तरह है, जैसा कि इसी साल फरवरी में अमेरिका में देखा गया था. बाद में पता चला था कि वो एक गुब्बारा है, जिसे चीन ने जासूसी के लिए भेजा था. हालांकि बाद में अमेरिका ने गुब्बारे को साउथ कैरोलिना के पास मार गिराया था.
इंफाल एयरपोर्ट के पास संदिग्ध वस्तु के आसमान में देखे जाने के बाद भारतीय वायु सेना (IFA) ने पूरी तरह से कमर कस ली थी. किसी भी स्थिति से निपटने के लिए इंडियन एयरफोर्स ने राफेल जेट को तैनात कर दिया. पश्चिम बंगाल के हासीमारा एयरफोर्स स्टेशन से नंबर 101 स्क्वाड्रन 'फाल्कन्स' के दो राफेल जेट 19 नवंबर को 'UFO' को रोकने के लिए आसमान में उड़े, लेकिन इसे ट्रैक करने में विफल रहे. फ्रांसीसी राफेल एडवांस सेंसर से लैस थे और उन्होंने निचले स्तर की उड़ान भरी, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला. ऐसे में सवाल ये कि आखिर वो संदिग्ध वस्तु कहां गायब हो गई?
सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की चर्चा
इंफाल के पास देखी जाने वाली संदिग्ध वस्तु को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की चर्चा सामने आई. कुछ लोगों ने कहा कि ये ड्रोन हो सकता है, जिसे आसपास के किसी शख्स ने उड़ाया होगा. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि चीन ने भारत की जासूसी गुब्बारे को भेजा हो.
बता दें कि आसमान में संदिग्ध वस्तु को देखे जाने के बाद इंफाल के बीर टिकेंद्रजीत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर परिचालन लगभग दो घंटे के लिए बंद करना पड़ा था. आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि 19 नवंबर को दोपहर 3:55 बजे, IAF पूर्वी कमान ने 'मिशन रेड और मिशन ब्लू' शुरू किया, जिसमें इम्फाल हवाई क्षेत्र में लगभग दो घंटे (शाम 5:35 बजे तक) के लिए लड़ाकू विमानों को तैनात किया गया. वायुसेना से मंजूरी के बाद शाम 5:50 बजे हवाईअड्डे पर उड़ान संचालन फिर से शुरू हुआ.
जासूसी के लिए अब अलग रणनीति अपना रहा चीन
जासूसी गुब्बारे चीन की निगरानी रणनीति में बिलकुल नए हैं. अमेरिका में हुई घटना के अलावा, जापान ने दावा किया था कि नवंबर 2019 और सितंबर 2021 के बीच उसके हवाई क्षेत्र में देखी गई तीन 'गुब्बारे के आकार की उड़ने वाली वस्तुएं' चीनी 'मानवरहित टोही' विमान थीं. ताइवान ने इस साल की शुरुआत में इसी तरह की हवाई वस्तुओं की सूचना दी थी.
जासूसी गुब्बारे चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के गुप्त रणनीतिक सहायता बल (SSF) द्वारा संचालित किए जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि वे 'पता लगाने और लड़ने' के कार्यों से सुसज्जित हैं. रक्षा पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन गुब्बारों में विद्युत चुम्बकीय पल्स जैमिंग क्षमता होती है. इन गुब्बारों को नानजियांग एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी और बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ एरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स की ओर से संयुक्त रूप से विकसित किया जाता है.
क्या है चीनी सेना का गुप्त रणनीतिक सहायता बल?
पेंटागन की हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, SSF एक थिएटर कमांड-स्तरीय संगठन है जो PLA के रणनीतिक अंतरिक्ष, साइबरस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक, सूचना, संचार और मनोवैज्ञानिक युद्ध मिशनों और क्षमताओं को केंद्रीकृत करने के लिए स्थापित किया गया है. SSF का नेटवर्क सिस्टम विभाग (साइबरस्पेस फोर्स) तकनीकी टोही और इलेक्ट्रॉनिक, साइबरस्पेस और मनोवैज्ञानिक युद्ध के लिए जिम्मेदार है।
SSF, पीएलए और सेना के पांच संयुक्त थिएटर कमांडों को अंतरिक्ष, साइबर और स्थलीय-आधारित माध्यमों से प्राप्त सूचना सहायता प्रदान करता है. इसका अंतरिक्ष प्रणाली विभाग सैन्य अंतरिक्ष संचालन के लिए जिम्मेदार है. SSF नामीबिया, पाकिस्तान, अर्जेंटीना और केन्या में ट्रैकिंग, टेलीमेट्री और कमांड स्टेशन संचालित करता है.