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'मुस्लिम अब हमारा...', रेजिनगर में बीजेपी की प्रचंड जीत पर सीएम सुवेंदु अधिकारी का बड़ा बयान

पश्चिम बंगाल की रेजिनगर सीट पर भाजपा की जीत ने चुनावी समीकरणों पर बहस छेड़ दी है. रेजिनगर मुस्लिम बहुल सीट है और यहां बीजेपी का जीतना विपक्ष के लिए संकट का संकेत है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'मुस्लिम अब हमारा...', रेजिनगर में बीजेपी की प्रचंड जीत पर सीएम सुवेंदु अधिकारी का बड़ा बयान
Courtesy: X

पश्चिम बंगाल की रेजिनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है. करीब 70 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं वाली इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार शंखारभ सरकार की जीत ने राजनीतिक दलों और विश्लेषकों का ध्यान खींचा है. खबरों के मुताबिक, उन्होंने लगभग 75 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. इस नतीजे ने सवाल खड़ा किया है कि क्या क्षेत्र में मतदाताओं की राजनीतिक पसंद बदल रही है.

हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद हुआ उपचुनाव

रेजिनगर सीट पर इससे पहले आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने जीत हासिल की थी. उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव में नउदा और रेजिनगर, दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. बाद में उन्होंने रेजिनगर सीट छोड़ दी, जिसके कारण उपचुनाव कराना पड़ा. उनकी पार्टी ने इस सीट पर उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह सीट बचाने में सफल नहीं रहे.

अब मुस्लिम बीजेपी का वोटर- सीएम

उपचुनाव के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि भाजपा को मुस्लिम समुदाय के लोगों का समर्थन मिल रहा है. खबर के मुताबिक, उन्होंने रेजिनगर में भाजपा को 60 प्रतिशत और नंदीग्राम में 80 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिलने का दावा किया. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में विकास कार्यों के कारण अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की सोच बदल रही है.

विकास और रोजगार के मुद्दों पर भाजपा का जोर

रेजिनगर में भाजपा के प्रचार अभियान में विकास, रोजगार और स्थानीय बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे. पार्टी ने अस्पताल, पुल, कॉलेज, औद्योगिक पार्क और रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे वादे किए. उम्मीदवार शंखारभ सरकार ने भी धार्मिक पहचान के बजाय विकास की जरूरतों पर ध्यान देने की अपील की.

उन्होंने कहा कि मतदाता अब धार्मिक बहसों से आगे बढ़कर शिक्षा, उद्योग और रोजगार जैसे मुद्दों पर जवाब चाहते हैं. राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, स्थानीय जरूरतों पर केंद्रित प्रचार ने भाजपा को उन मतदाताओं तक पहुंचने में मदद की होगी जो पहले अन्य दलों का समर्थन करते रहे थे.

बाबरी मस्जिद की घोषणा का कितना असर पड़ा?

हुमायूं कबीर ने विधानसभा चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा की थी. इस बयान ने राज्य की राजनीति में विवाद पैदा किया था लेकिन उपचुनाव में भाजपा की जीत के बाद यह सवाल उठ रहा है कि धार्मिक मुद्दों की तुलना में विकास और रोजगार के वादों का मतदाताओं पर कितना प्रभाव पड़ा.

हुमायूं कबीर की गैरमौजूदगी भी बनी चर्चा का विषय

पिछले विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने रेजिनगर से 1,23,536 वोट हासिल किए थे. भाजपा के बापन घोष को 64,660 और तृणमूल कांग्रेस के अताउर रहमान को 41,718 वोट मिले थे. उपचुनाव में हुमायूं कबीर खुद उम्मीदवार नहीं थे. उनकी जगह उनके बेटे को मैदान में उतारने का फैसला पार्टी के लिए चुनौती साबित हुआ.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, स्थानीय नेतृत्व और उम्मीदवार की व्यक्तिगत लोकप्रियता चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है. हालांकि, भाजपा की जीत में किस कारक की कितनी भूमिका रही, इसे केवल नतीजों के आधार पर निश्चित नहीं कहा जा सकता.

मतदान के दिन विवाद ने बढ़ाया राजनीतिक तनाव

खबर के अनुसार, 6 अक्टूबर को मतदान के दौरान हुमायूं कबीर और पुलिस के बीच विवाद हुआ तथा उनकी गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई. कबीर ने पुलिस पर मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था. वहीं, भाजपा और राज्य नेतृत्व ने मतदान में धांधली के आरोपों का खंडन किया.

क्या बंगाल में बदल रहे हैं चुनावी समीकरण?

रेजिनगर में भाजपा की जीत राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन एक सीट के नतीजे से पूरे बंगाल के मुस्लिम मतदाताओं के रुझान में बदलाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. सुवेंदु अधिकारी का दावा राजनीतिक बहस को जरूर तेज करता है. यह समझने के लिए कि क्या भाजपा का समर्थन वास्तव में बढ़ा है, अलग-अलग क्षेत्रों के चुनावी नतीजों, उम्मीदवारों की लोकप्रियता और स्थानीय मुद्दों का तुलनात्मक अध्ययन जरूरी होगा.