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India Daily

व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा: दोस्त मोदी के साथ प्राइवेट डिनर, 28 घंटे का क्या है मेगा प्लान?

पुतिन का विमान गुरुवार शाम करीब सवा चार बजे दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरेगा. आगमन के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें निजी रात्रिभोज देंगे.

Gyanendra Sharma
व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा: दोस्त मोदी के साथ प्राइवेट डिनर, 28 घंटे का क्या है मेगा प्लान?
Courtesy: Photo-Social Media

नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा के लिए भारत पहुंचेंगे. शाम करीब साढ़े चार बजे दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है. लगभग 28 घंटे की यह छोटी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने का संकेत दे रही है. विशेष रूप से तब, जब भारत और अमेरिका के बीच संबंध पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं.

पुतिन का विमान गुरुवार शाम करीब सवा चार बजे दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरेगा. आगमन के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें निजी रात्रिभोज देंगे. यह आतिथ्य पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी की मॉस्को यात्रा का जवाबी कदम है, जब राष्ट्रपति पुतिन ने भी उन्हें अपने निवास पर निजी डिनर दिया था. दोनों नेताओं के बीच यह व्यक्तिगत केमिस्ट्री भारत-रूस संबंधों की खासियत रही है.

औपचारिक कार्यक्रमों का दौर

शुक्रवार सुबह पुतिन राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे. इसके बाद राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत होगा. दिन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता होगा, जो हैदराबाद हाउस में होगी. इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी पुतिन और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए दोपहर का भोज भी आयोजित करेंगे. शाम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनके सम्मान में राजकीय भोज देंगी. कार्यक्रमों का सिलसिला पूरा होने के बाद पुतिन शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे दिल्ली से रवाना हो जाएंगे.

 व्यापार घाटा और अमेरिकी प्रतिबंधों पर खुली बातचीत

इस यात्रा में आर्थिक मुद्दे केंद्र में रहेंगे. भारत पिछले तीन साल से रूस से भारी मात्रा में रियायती कच्चा तेल खरीद रहा है, जिसके कारण द्विपक्षीय व्यापार में भारी असंतुलन पैदा हो गया है. भारत का रूस के साथ व्यापार घाटा अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है. भारतीय पक्ष इस मुद्दे को शिखर वार्ता में उठाएगा और रूस से भारतीय वस्तुओं, विशेष रूप से कृषि उत्पाद, दवाइयों और इंजीनियरिंग सामान के लिए बाजार खोलने की मांग करेगा.

साथ ही अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीदने पर भारतीय निर्यातों पर लगाए गए 25% अतिरिक्त शुल्क और कुल 50% तक के भारी आयात शुल्क का मुद्दा भी चर्चा में रहेगा. ये प्रतिबंध भारत के निर्यात क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं. दोनों नेता इस स्थिति से निपटने के नए तंत्र और भुगतान व्यवस्था पर विचार कर सकते हैं. बता दें कि भारत और रूस संबंधों के संपूर्ण आयाम की समीक्षा के लिए भारत के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति के बीच प्रतिवर्ष एक शिखर बैठक होती है. अब तक भारत और रूस में बारी-बारी से 22 वार्षिक शिखर बैठकें हो चुकी हैं.