Budget 2026: ब्रीफकेस की सालों से चली आ रही परंपरा को निर्मला सीतारमण से तोड़ा, जानें क्यों बदलाव कर बहीखाता लाईं वित्तमंत्री
लाल बहीखाता बजट की औपनिवेशिक परंपरा से दूरी और भारतीय पहचान का प्रतीक बन गया है. निर्मला सीतारमण ने 2019 में इसे अपनाकर बजट इतिहास में नया अध्याय जोड़ा.
नई दिल्ली: बजट 2026 पेश होने में बस एक दिन बचा है. ऐसे में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लाल बहीखाते और उसमें अलग-अलग सेक्टरों के लिए क्या हो सकता है. इस पर फिर से ध्यान गया है. यह 2019 में पहली बार पेश किया गया, यह पारंपरिक लाल बहीखाता तब से न सिर्फ एक काम की चीज है, बल्कि औपनिवेशिक काल की परंपराओं से दूर हटकर एक सचेत बदलाव का प्रतीक बन गया है.
बहीखाते की ओर बढ़ना ब्रिटिश-युग की बजट प्रथाओं से बड़े बदलाव का एक हिस्सा था. एक पहले का बदलाव अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान आया था, जब बजट पेश करने का समय शाम से बदलकर सुबह कर दिया गया था, जो मूल रूप से लंदन स्टॉक एक्सचेंज के खुलने के समय से मेल खाने के लिए तय किया गया था.
संसद में कैसे आया बहीखाता?
लाल बहीखाते के पीछे का विचार वितमंत्री सीतारमण की यूनाइटेड किंगडम में काम करने के दिनों की यादों से आया, जहां उन्होंने ब्रिटिश चांसलर को 'EIIR, एलिजाबेथ-II रेजिना' प्रतीक वाला बैग ले जाते देखा था. उन्होंने बताया, 'ब्रिटेन में मेरे दिनों के दौरान, चांसलर EIIR, एलिजाबेथ-II रेजिना प्रतीक वाला बैग ले जाते थे. वह याद बहुत मजबूत है और मैं ऐसा बैग नहीं ले जाना चाहती थी जिसमें EIIR न हो, बल्कि ब्रिटिश असर हो. अब समय आ गया है कि हम अपनी चीज अपनाएं.
बहीखाता किसने बनाया?
सीतारमण ने बताया कि बहीखाता उनकी मामी ने बनाया और डिजाइन किया था. 'मेरी मामी ने इसे बनाया है. उन्होंने इस पर यह आधिकारिक प्रतीक उभारा था. यह बैग मुंबई में सिद्धिविनायक और महालक्ष्मी मंदिरों में ले जाया गया था. वह वहां गईं, पूजा की, और मुझे दे दिया.
किससे बना होता है बहीखाता?
पारंपरिक बहीखाता सूती कपड़े से बना होता है और धागे से बंधा होता है, जिसके पन्ने हाथ से बने कागज से बने होते हैं. लाल बहीखाते के ऊपर सोने में राष्ट्रीय प्रतीक बना होता है. उनके इस फैसले तक, चमड़े का ब्रीफकेस भारत के बजट पेश करने का एक स्थायी हिस्सा रहा था, जिसका इस्तेमाल आर के शनमुखम चेट्टी से लेकर अरुण जेटली और पीयूष गोयल तक हर वित्त मंत्री ने किया था.