हजारों योजनाओं के लिए सरकार के पास कहां से आता है अरबों रुपये का बजट, कैसे भरता है सरकारी खजाना?
1 फरवरी 2026 को आम बजट पेश किए जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. जिसमें सरकारी खजाने का हिसाब-किताब किया जाएगा. आज हम आपको बताएंगे कि सरकार खजाने को कैसे भरती है.
नई दिल्ली: संसद में 1 फरवरी 2026 को आम बजट पेश होना है, जिसपर पूरे देश की नजर है. आम लोगों के लिए बजट का मतलब वस्तुओं की कीमतों में बदलाव या फिर इनकम टैक्स स्लैब में छूट होता है. लेकिन सरकार इस दौरान अपना पूरा बहीखाता चेक करती और तय करती है कि आगे का काम कैसे किया जाएगा. क्या आपको पता है कि देश को चलाने के लिए कितने पैसों की जरूरत होती और सरकार इतने विशाल व्यय को कहां से जुटाती है.
घर को चलाने के लिए जैसे परिवार का मुखिया परिवार बजट तय करता है वैसे ही एक देश को चलाने के लिए भी सरकार अपना हिसाब बनाती है. हम सब जानते हैं कि जिस क्षेत्र में कमी होती है सरकार उन क्षेत्रों का बजट बढ़ा देती है लेकिन यह बजट आता कहां से है इसके बारे में शायद सबको मालूम ना हो, तो चलिए जानते हैं कि सरकारी खजाना कैसे भरता है.
सरकारी खजाने को भरने का दो तरीका
सरकार की आय का सबसे बड़ा हिस्सा इनकम टैक्स के कलेक्शन से होता है. इसी से देश की आर्थिक संरचना को मजबूत होती है. टैक्स भी दो तरह के होते हैं पहला डायरेक्ट टैक्स और दूसरा इनडायरेक्ट टैक्स होता है. डायरेक्ट टैक्स में व्यक्तिगत आयकर और कॉर्पोरेट टैक्स शामिल हैं, जहां नागरिक अपनी कमाई का एक हिस्सा सीधे सरकार को सौंपते हैं. डायरेक्ट टैक्स अमीरों से ज्यादा गरीबों से कम लिए जाते हैं, जिससे की सभी लोगों को सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके.
वहीं दूसरा टैक्स इनडायरेक्ट टैक्स होता है, जो लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा तो होता है लेकिन उन्हें सीधे तौर पर पता नहीं चल पाता है. जैसे की जब आप बाजार से कोई सामान खरीदते हैं, तो उस पर लगने वाला वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सरकारी खाते में जाता है. इसी तरह, ईंधन भरवाने पर उत्पाद शुल्क या शराब जैसी वस्तुओं पर लगने वाली ड्यूटी भी राजस्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती है.
क्या है दूसरा तरीका?
सरकार का खजाना केवल टैक्स पर निर्भर नहीं करता है. नॉन-टैक्स रेवेन्यू भी धन इकट्ठा करने का एक बहुत बड़ा माध्यम है. जैसे की जैसे पासपोर्ट जारी करना या लाइसेंस नवीनीकरण समेत कई ऐसे काम है जिससे भी रेवेन्यू वसूला जाता है. यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर लगने वाले जुर्माने भी इसी श्रेणी में आते हैं. इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जैसे भारतीय रेलवे, सरकारी बैंक, डाक विभाग और ओएनजीसी लाभ कमाती हैं, जिसका लाभांश सरकार को प्राप्त होता है.
प्राकृतिक संसाधनों से इनडायरेक्ट तरीके से आने वाला भी पैसा इसी श्रेणी में जाता है. जैसे की कोयला खदानों की नीलामी, खनिजों का उत्खनन या दूरसंचार स्पेक्ट्रम की बोली से हजारों करोड़ रुपये आते हैं. ये स्रोत न केवल विविधता प्रदान करते हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं. हालांकि इतने के बाद भी कभी-कभी सरकारी व्यय आय से अधिक हो जाता है. ऐसी स्थिति में सरकार उधार लेने का विकल्प चुनती है. बाजार में सरकारी बॉन्ड जारी किए जाते हैं, जिन्हें बैंक, बीमा कंपनियां या आम नागरिक खरीदते हैं.