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'भ्रम फैलाया जा रहा...' UGC नियमों पर सरकार जल्द खत्म करेगी सस्पेंस; होगा दूध का दूध और पानी का पानी

यूजीसी नियमों को लेकर चल रहे विवाद पर सरकार जल्द ही स्थिति साफ करने जा रही है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार बहुत जल्द तथ्यों के साथ फैक्ट जारी करेगी, ताकि किसी भी तरह का भ्रम दूर किया जा सके.

GEMINI (प्रतिकात्मक)
Reepu Kumari

यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों ने देश की राजनीति और शैक्षणिक माहौल को गर्मा दिया है. दिल्ली में आज विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया पर नियमों को वापस लेने की मांग जोर पकड़ रही है. इसी बीच सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह बहुत जल्द इस पूरे विवाद पर फैक्ट चेक जारी करेगी और स्थिति स्पष्ट करेगी.

सरकारी सूत्रों का कहना है कि इन नियमों को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है. सरकार का दावा है कि नियमों का उद्देश्य किसी भी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है. बजट सत्र से पहले विपक्ष इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है.

नियमों पर सरकार का रुख

सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार जल्द एक आश्वासन जारी करेगी कि यूजीसी नियमों का किसी भी सूरत में दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा. मंत्रालय की कोशिश है कि सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाएं ताकि छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच फैला भ्रम खत्म हो सके. सरकार मानती है कि स्पष्ट संवाद की कमी के कारण यह विवाद बढ़ा है, जिसे जल्द दूर किया जाएगा.

विवाद की जड़ क्या है

यूजीसी के ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ नियम 15 जनवरी 2026 से लागू हो चुके हैं. इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता बढ़ाना और जातिगत भेदभाव रोकना बताया गया है. हालांकि सोशल मीडिया पर इन्हें सवर्णों के खिलाफ बताकर विरोध किया जा रहा है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है.

यूजीसी का पक्ष और आंकड़े

यूजीसी का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के खिलाफ भेदभाव की शिकायतों में 118.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. वर्ष 2019-20 में 173 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 378 हो गईं. आयोग का तर्क है कि ये आंकड़े नए नियमों की जरूरत को साबित करते हैं.

सुप्रीम कोर्ट में मामला

नए नियमों के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है. याचिकाकर्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश की बेंच के सामने जल्द सुनवाई की मांग करने की तैयारी की है. याचिका में कहा गया है कि ये नियम यूजीसी एक्ट और समान अवसर की भावना के खिलाफ हैं, जिससे भेदभाव कम होने के बजाय बढ़ सकता है.

विरोध और आशंकाएं

जनरल कैटेगरी के छात्रों और संगठनों का आरोप है कि नियम एकतरफा हैं और इनके जरिए झूठी शिकायतों का दुरुपयोग हो सकता है. वहीं दलित और पिछड़े वर्ग के छात्र इसे अपनी सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं. इसी टकराव के बीच सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह जल्द स्पष्ट और संतुलित रुख सामने रखे.