उद्धव के बागी सांसदों की पहली पसंद भाजपा! महाराष्ट्र की सियासत में नया ट्विस्ट
महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल के बीच शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है. सूत्रों के अनुसार ये सांसद शिंदे गुट के बजाय भाजपा को प्राथमिकता दे रहे हैं.
नई दिल्ली: शिवसेना (यूबीटी) में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आता दिख रहा है. पार्टी के नौ सांसदों में से छह सांसदों ने संसदीय दल की बैठक से दूरी बनाकर नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया है. शुरुआती अटकलें थीं कि ये सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं, लेकिन अब राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है. सूत्रों का कहना है कि बागी सांसदों की पहली पसंद भाजपा है और वे अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नई संभावनाएं तलाश रहे हैं.
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के रुख ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है. इन सांसदों ने पार्टी व्हिप की अनदेखी करते हुए संसदीय दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया. इसके बाद यह संकेत और मजबूत हो गया कि पार्टी के भीतर असंतोष गहरा चुका है. राजनीतिक जानकार इसे आने वाले दिनों में बड़े बदलाव का संकेत मान रहे हैं.
भाजपा की ओर झुकाव की चर्चा
सूत्रों के अनुसार नाराज सांसद फिलहाल एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाने के इच्छुक नहीं हैं. बताया जा रहा है कि उनकी प्राथमिकता भाजपा है. इतना ही नहीं, यदि वे किसी नए राजनीतिक समीकरण का हिस्सा बनते हैं तो अगले चुनाव में टिकट को लेकर स्पष्ट आश्वासन भी चाहते हैं. इससे महाराष्ट्र की राजनीति में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है.
Also Read
किन सांसदों के नाम चर्चा में
जिन नेताओं के बगावती रुख की चर्चा है, उनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-आष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल बताए जा रहे हैं. इन नेताओं की बैठक से गैरमौजूदगी ने अटकलों को और तेज कर दिया है. हालांकि उनकी ओर से अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है.
संजय राउत ने लगाए गंभीर आरोप
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने बागी सांसदों को लेकर कई बड़े दावे किए हैं. उनका कहना है कि बागी खेमे में मंत्री पद को लेकर मतभेद हैं. राउत ने आरोप लगाया कि केवल एक सांसद को मंत्री पद मिलने की संभावना है, जबकि बाकी लोगों को आर्थिक लाभ देने की चर्चा चल रही है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.