TMC में बड़ी फूट! ममता की बैठक में पहुंचे सिर्फ 4 सांसद और 8 MLA; अभिषेक बनर्जी पर बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) का संकट गहरा गया है. ममता बनर्जी के आवास पर बुलाई गई आपातकालीन बैठक का दो-तिहाई से अधिक बागी विधायकों और सांसदों ने पूरी तरह बहिष्कार कर दिया.

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Kanhaiya Kumar Jha

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर का अंतर्कलह अब खुलकर सामने आ गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर शुक्रवार को बुलाई गई पार्टी के शीर्ष नेताओं की आपातकालीन बैठक पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई. इस अहम बैठक में पार्टी के अधिकांश निर्वाचित प्रतिनिधियों ने दूरी बना ली. इससे अब ये साफ हो गया है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ पार्टी के भीतर विद्रोह की आग अब बेकाबू हो चुकी है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से दो-तिहाई से अधिक नेता खुलेआम बगावत पर उतारू हैं. इससे पहले भी 60 विधायकों ने एक महत्वपूर्ण बैठक का सामूहिक रुप से बहिष्कार किया था. शुक्रवार की इस समीक्षा बैठक में स्थिति और बदतर हो गई, जब ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के सामने दफ्तर में सिर्फ आठ वफादार विधायक ही उपस्थित हुए, जिसने शीर्ष नेतृत्व के होश उड़ा दिए.

लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने भी बनाई दूरी

इस बैठक में केवल विधायकों ने ही नहीं, बल्कि पार्टी के सांसदों ने भी ममता बनर्जी को तगड़ा झटका दिया. लोकसभा के कुल 28 सांसदों में से महज 4 सदस्य ही कालीघाट पहुंचे. वहीं राज्यसभा की स्थिति तो और भी चिंताजनक रही, जहां 13 सांसदों में से 11 ने बैठक से पूरी तरह किनारा कर लिया. उच्च सदन से केवल डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन ही शीर्ष नेतृत्व के साथ खड़े दिखाई दिए, जबकि बाकी सांसदों की गैरमौजूदगी ने बड़े दलबदल के संकेतों को हवा दे दी.

संगठनात्मक बदलावों के जरिए नियंत्रण की कोशिश

बगावत के इस बेहद नाजुक दौर के बीच तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी संगठन में कई राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर बड़ी नियुक्तियों का एलान किया है. अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखते हुए उनकी मदद के लिए दो नए संयुक्त सचिव नियुक्त किए गए हैं. इसके अलावा, चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल प्रदेश तृणमूल कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि पुराने वफादार सुब्रत बख्शी को राष्ट्रीय कार्यसमिति में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

युवा और विंग्स की कमान नए चेहरों को

पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए ममता बनर्जी ने विभिन्न मोर्चों पर नए अध्यक्षों की घोषणा की है. इसके तहत सायोनी घोष को टीएमवाईसी (युवा विंग) की कमान सौंपी गई है, जबकि माला रॉय को महिला विंग और मोलॉय घटक को आईएनटीटीयूसी की जिम्मेदारी मिली है. प्रवक्ता पैनल में कुणाल घोष और कल्याण बनर्जी को बनाए रखा गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी अनुपस्थिति के बीच किए गए ये सांगठनिक बदलाव पार्टी के आंतरिक कलह को दबाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं.