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I.N.D.I.A गठबंधन में दिल की दूरी होगी कम, UP में सपा और कांग्रेस इतनी सीटों पर लड़ सकती है चुनाव!

2024 लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर इंडिया गठबंधन के अंदर रार छिड़ी हुई है. यूपी में कांग्रेस और सपा साझेदार दल है. ऐसे में सियासी गलियारों में इन दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग का संभावित चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.

Avinash Kumar Singh

नई दिल्ली: 2024 लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर इंडिया गठबंधन के अंदर रार छिड़ी हुई है. यूपी में कांग्रेस और सपा साझेदार दल है. ऐसे में सियासी गलियारों में इन दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग का संभावित चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. मिली जानकारी के मुताबिक इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग फॉर्मूला का ब्लूप्रिंट लगभग तैयार है. किस राज्य में कौन सी पार्टी कितने सीट पर चुनाव लड़ेगे. इसकी तस्वीर जल्द साफ होने की उम्मीद है. 

सपा-कांग्रेस इतनी सीटों पर लड़ सकती है चुनाव? 

यूपी में 80 लोकसभा की सीटें है. दिल्ली की सत्ता की सीढ़ी यूपी से होकर गुजरती है. ऐसे में यूपी में इंडिया गठबंधन में घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर प्रारम्भिक स्तर की बातचीत शुरू हो गई है. सूत्रों के मिली जानकारी के मुताबिक 80 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस को 8-10, समाजवादी पार्टी को 65 और अन्य स्थानीय घटक दलों को 5-7 सीटें दी जा सकती हैं. घटक दलों में जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी भी शामिल है. बीते दिनों सपा मुखिया अखिलेश यादव ये बात कह चुके हैं कि सपा यूपी में 65 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और बाकी सीटें अन्य साथी दलों के लिए छोड़ देगी. 

कांग्रेस और सपा के बीच सियासी शीत युद्ध की इनसाइड स्टोरी

बीते दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डाले तो यह बात सीसे की तरह साफ है कि कांग्रेस और सपा के बीच सियासी शीत युद्ध चल रहा है. कांग्रेस और सपा के बीच सियासी तल्खियों की खबरें सियासी हलकों में चर्चा के केंद्र में रही है. बीते दिनों सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जाति जनगणना को लेकर अपने सहयोगी दल कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. कांग्रेस की ओर से जातिय जनगणना का मुद्दा उछाले जाने पर अखिलेश यादव मे बड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कांग्रेस वह पार्टी है जिसने आजादी के बाद जाति जनगणना नहीं कराई. जब लोकसभा में सभी दल जाति जनगणना की मांग कर रहे थे, तब उन्होंने जाति जनगणना नहीं कराई. ऐसे में अगर अब कांग्रेस इस मुद्दे के साथ आगे आना चाहती है तो हम सबको मिलकर एक मंच पर काम करना होगा. तमाम तरह के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब देखना यह दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और सपा की दोस्ती कितनी परवान चढ़ती है और 2024 महासमर में क्या गुल खिलाती है?