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'आगरा का किला, फतेहपुर सीकरी और...' लाल किले पर कब्जे वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

महिला ने बहादुर शाह जफर द्वितीय के परपोते की विधवा होने का दावा किया था. शीर्ष अदालत ने दावे को गलत और निराधार बताया. सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा, शुरू में दायर की गई रिट याचिका गलत और निराधार थी. इस पर विचार नहीं किया जा सकता.

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Gyanendra Sharma

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लाल किले पर कब्जे की मांग करने की एक महिला की याचिका को खारिज कर दिया. महिला ने बहादुर शाह ज़फ़र द्वितीय के परपोते की विधवा होने का दावा किया था. शीर्ष अदालत ने दावे को गलत और निराधार बताया. सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा, शुरू में दायर की गई रिट याचिका गलत और निराधार थी. इस पर विचार नहीं किया जा सकता.

सीजेआई ने आगे कहा कि अगर दलीलों पर विचार किया जाए, तो यह सवाल उठेगा कि केवल लाल किला ही क्यों, आगरा, फतेहपुरी सीकरी और अन्य स्थानों के किले क्यों नहीं. अपनी याचिका मे, सुल्ताना बेगम ने दावा किया कि 1857 में स्वतंत्रता के पहले युद्ध के बाद अंग्रेजों द्वारा जबरन लाल किले पर कब्जा करने के बाद उनके परिवार को गलत तरीके से लाल किले से वंचित किया गया था. उन्होंने कहा कि तत्कालीन सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र द्वितीय - उनके पूर्वज और अंतिम मुगल शासक को निर्वासित कर दिया गया था और किले पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया गया था.

बेगम का तर्क

यह तर्क देते हुए कि उन्हें उनकी विधवा के वंशज के रूप में संपत्ति विरासत में मिली है, उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार एक अवैध कब्ज़ाधारी है. याचिका में लाल किले को वापस करने या कथित अवैध कब्जे के लिए 1857 से लेकर आज तक के नुकसान सहित पर्याप्त मुआवज़ा देने की मांग की गई. बेगम का कहना है कि वह अपने खराब स्वास्थ्य और अपनी बेटी के निधन के कारण अपील दायर नहीं कर सकीं.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिसंबर में महिला की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसे शीर्ष अदालत का रुख करना पड़ा. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने टिप्पणी की थी, आप 164 साल देरी से आए हैं. उसने 2021 में भी इसी तरह की याचिका दायर की थी, जिसे भी खारिज कर दिया गया था.