'हम AI के दौर में हैं...', सोनम वांगचुक के ट्रांसक्रिप्ट में गड़बड़ियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने की केंद्र पर सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक के भाषण की ट्रांसक्रिप्ट में कथित गड़बड़ियों के लिए केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने सही रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश देते हुए कहा कि AI के जमाने में एक्यूरेसी जरूरी है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक के केस में रिकॉर्डिंग वाली बात पर कहा है कि अगर 3 मिनट के भाषण का ट्रांसक्रिप्शन 7-8 मिनट तक चलता है, तो इसमें कुछ गलतफहमी है और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के भाषण के ट्रांसलेशन पर केंद्र की खिंचाई की, जिसके आधार पर उन्हें सितंबर में गिरफ्तार किया गया था.

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कल वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की हेबियस कॉर्पस पिटीशन में दलीलें सुनीं. अंगमो की तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने केंद्र द्वारा बताए गए ट्रांसक्रिप्ट दिखाए. 'लद्दाखियों का आत्मदाह' - यह उसमें नहीं है. 'सरकार गिराओ' - उसमें नहीं है. यह कोई ऐसी बात नहीं है जिससे उन्हें हैरानी हो. मैंने यह सब पहले कहा था. सिब्बल ने कहा, 'उन्होंने कभी जवाब नहीं दिया.'

इसके बाद कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा, 'मिस्टर नटराज, हमें इन भाषणों की असली ट्रांसक्रिप्ट चाहिए. इसी आधार पर डिटेंशन ऑर्डर पास किया गया है.'

कोर्ट ने आगे क्या कहा?

कोर्ट ने कहा, 'आपने जो टेबल वाली लिस्ट फाइल की है, उसमें से कुछ बातें डिटेंशन ऑर्डर में भी जगह नहीं पातीं. कम से कम वांगचुक जो कहते हैं, उसकी सही ट्रांसक्रिप्ट तो होनी चाहिए. इसमें कोई अंतर नहीं होना चाहिए. 

जब एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एक डिपार्टमेंट ने ट्रांसक्रिप्ट तैयार की है और 'हम एक्सपर्ट नहीं हैं', तो कोर्ट ने जवाब दिया, 'हम AI के जमाने में हैं. सटीकता 98 परसेंट होनी चाहिए.'

केंद्र पर निशाना साधते हुए सिब्बल ने क्या कहा?

केंद्र पर निशाना साधते हुए सिब्बल ने कहा, 'उन्होंने ऐसी चीज पर भरोसा किया जो मौजूद नहीं है और फिर वे कहते हैं कि यह सब्जेक्टिव सैटिस्फैक्शन है? किसी ऐसी चीज का सब्जेक्टिव सैटिस्फैक्शन जो मौजूद नहीं है?' मैंने कहीं नहीं कहा कि आप GenZ वगैरह जैसे बनें और यह सब सॉलिसिटर जनरल ने दिया है.'

उन्होंने कहा कि वांगचुक कहते हैं कि मैनिफेस्टो में हमसे 'राज्य का दर्जा' वादा किया गया था और वह दिया नहीं गया. अब पांच साल बीत चुके हैं. हमें इसके बारे में कुछ करना चाहिए और वह जो करते हैं वह अनशन यानी स्ट्राइक है. 2022 के बाद से क्या उनके किसी भाषण से कोई हिंसा भड़की है? हम ऐसे किसी केस से भी नहीं निपट रहे हैं जिसमें हिंसा या पब्लिक में गड़बड़ी करने के लिए उकसाया गया हो.

एक समय पर कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यह दोहा है 'हमने वह भी सुना जो उन्होंने कहा ही नहीं'. सिब्बल ने जवाब दिया, 'हां, और जो हम कह रहे हैं उन्होंने सुना ही नहीं.'

कोर्ट ने क्या दिया आदेश?

कोर्ट ने वांगचुक के भाषण की रिकॉर्डिंग वाली एक पेनड्राइव भी मांगी, जो अधिकारियों ने उन्हें हिरासत के समय दी थी. कोर्ट ने कहा कि पेनड्राइव को जोधपुर की जेल से एक सीलबंद बॉक्स में इकट्ठा किया जाए, जहां वांगचुक अभी बंद हैं और कल कोर्ट में पेश किया जाए. वांगचुक पर सख्त नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत आरोप लगाए गए हैं.