IPL 2026

'यह छात्रों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा', नीट पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख; सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी से लाखों छात्र और उनके अभिभावक मानसिक रूप से आहत होते हैं.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' को लेकर मचे घमासान के बीच देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बेहद भावुक और सख्त टिप्पणी की है. परीक्षा में धांधली और पेपर लीक की घटनाओं से परेशान लाखों परीक्षार्थियों के पक्ष में खड़े होते हुए अदालत ने साफ कहा है कि होनहार युवाओं को इस तरह निराश नहीं होने दिया जा सकता। इस मामले में अब सीधे सरकार से जवाब मांगा गया है ताकि भविष्य में ऐसी बड़ी गलतियों को दोबारा होने से पूरी तरह रोका जा सके.

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान व्यवस्था को सुधारने की बात कही. अदालत का मानना है कि जब तक इस पूरे सिस्टम में गड़बड़ी करने वाले असली चेहरों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक यह समस्या जड़ से खत्म नहीं हो सकती. बेंच ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना भर नहीं हैं, बल्कि यह देश के ईमानदार छात्रों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है.

'चंद लोगों की वजह से लाखों के भविष्य से नहीं खेला जा सकता'

अदालत ने इस पूरी स्थिति को बेहद दुखद और संवेदनशील माना है. जजों ने कहा कि एक छात्र जब किसी बड़ी परीक्षा की तैयारी करता है, तो उसमें उसके जीवन के कई साल, कड़ी मेहनत और उसके पूरे परिवार की भावनाएं लगी होती हैं. माता-पिता अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए अपनी जमा-पूंजी लगा देते हैं. ऐसे में किसी भी एजेंसी की लापरवाही या चंद लोगों के लालच की वजह से उनकी इस तपस्या को बेकार होने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जा सकती.

सरकार की तरफ से क्या कहा गया?

सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि केंद्र इस मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर है. उन्होंने अदालत को सूचित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि आगामी 21 जून को होने वाले नीट-यूजी री-टेस्ट को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित माहौल में कराने के लिए प्रशासन ने बेहद कड़े और नए सुरक्षा इंतजाम किए हैं.

परीक्षा एजेंसी के पुनर्गठन की उठी मांग

अदालत के सामने दायर की गई विभिन्न याचिकाओं में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि परीक्षाओं को निष्पक्ष ढंग से कराने के लिए या तो एनटीए के ढांचे में आमूल-चूल बदलाव किया जाए या फिर इसकी जगह किसी अन्य स्वायत्त और मजबूत संस्था का गठन हो. सुप्रीम कोर्ट ने अब सरकार से पूछा है कि वह विशेषज्ञों की भागीदारी और संस्थागत निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठा रही है.

अदालत ने इन सभी दलीलों को सुनने के बाद केंद्र सरकार को एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है, जिसमें सुरक्षा और सुधारों का पूरा खाका पेश करना होगा. इस मामले की अगली सुनवाई अब जुलाई के दूसरे हफ्ते में होगी. गौरतलब है कि 3 मई को हुई परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद उसे रद्द कर दिया गया था, जिसकी जांच वर्तमान में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथों में है.