दिल्ली में CJP के प्रदर्शन पर पाबंदियों को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट दोपहर 2 बजे करेगा सुनवाई
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट दोपहर दो बजे सुनवाई करेगा. कोर्ट ने विरोध और नागरिक अधिकारों में संतुलन पर जोर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार और दूसरे नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है. अदालत ने दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दोपहर 2 बजे सुनवाई करने पर सहमति जताई. यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर बुलाया गया है.
वरिष्ठ वकीलों ने उठाए प्रतिबंधों पर सवाल
आवाजाही पर रोक का मुद्दा: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के सामने कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर समेत कई वरिष्ठ वकीलों ने पुलिस की कथित व्यापक पाबंदियों पर सवाल उठाए. वकीलों ने मेट्रो स्टेशन बंद करने, ट्रेनों को रद्द करने, आवाजाही सीमित करने और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) व होटलों को कथित निर्देश देने जैसे मुद्दे उठाए.
सरकार ने कानून-व्यवस्था का दिया हवाला
पाबंदियों के पीछे सुरक्षा का तर्क: कपिल सिब्बल ने राष्ट्रीय राजधानी में व्यापक प्रतिबंध लगाने के औचित्य पर सवाल किया. वहीं, अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि किसी अप्रिय घटना के बिना इतने बड़े स्तर पर एहतियाती कदम उचित नहीं ठहराए जा सकते. सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये उपाय कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए गए हैं.
आम नागरिकों की सुविधाओं पर भी चिंता
अधिकारों में संतुलन जरूरी: न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और आम नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच के बीच संतुलन जरूरी है. उन्होंने अदालत के सामने रखी गई सामग्री के आधार पर पुलिस की कार्रवाई को प्रथम दृष्टया अनुपातहीन बताया.