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सावधान! आ रहा है 'सुपर अल नीनो', मौसम वैज्ञानिकों ने दी इतिहास की सबसे भीषण गर्मी की चेतावनी; टूटने वाले हैं सारे रिकॉर्ड

अल नीनो के प्रभाव से 2026-27 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ने की आशंका है. मार्च से ही बढ़ते तापमान और वैज्ञानिकों की चेतावनियों ने भविष्य के गंभीर जलवायु संकट और 'सुपर अल नीनो' की आहट दे दी है.

Grok
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: इस साल गर्मी की शुरुआत ने अभी से डराना शुरू कर दिया है. मार्च के महीने में ही दिल्ली से लेकर राजस्थान तक पारा 35 से 38 डिग्री के बीच झूल रहा है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन और वैश्विक वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में धरती एक 'सुपर अल नीनो' का सामना कर सकती है. यह स्थिति न केवल तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाएगी, बल्कि सूखा, बाढ़ और भयंकर लू जैसे खतरों को भी जन्म देगी.

भारत के कई राज्यों में मार्च से ही भीषण गर्मी का अहसास होने लगा है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है. राजस्थान के कुछ हिस्सों और महाराष्ट्र के विदर्भ में तो अभी से लू चलने लगी है. मौसम विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि यदि मार्च का यह हाल है, तो मई-जून की गर्मी कितनी प्रचंड होगी. यह बढ़ता पारा एक बड़े जलवायु खतरे का स्पष्ट संकेत है.

सुपर अल नीनो की चेतावनी 

वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि इस साल अल नीनो (ENSO) के विकसित होने की 60 फीसदी संभावना है. प्रशांत महासागर में पानी का तापमान औसत से 2 डिग्री अधिक बढ़ने से वायुमंडल में गहरा बदलाव आएगा. यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्ट्स के अनुसार, इस साल के अंत तक एक 'शक्तिशाली' या 'सुपर' अल नीनो विकसित हो सकता है. यह स्थिति इतिहास के सबसे गर्म वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ सकती है, जिससे पूरी दुनिया का मौसम पैटर्न बदल जाएगा.

वैश्विक मौसम पर भयंकर असर 

अल नीनो केवल तापमान ही नहीं बढ़ाता, बल्कि दुनिया भर के महाद्वीपों में मौसम को अस्त-व्यस्त कर देता है. इसके प्रभाव से पश्चिमी अमेरिका में अत्यधिक गर्मी और कुछ उष्णकटिबंधीय देशों में गंभीर सूखे की स्थिति बन सकती है. समुद्र की बर्फ घटने और तूफानों की तीव्रता बढ़ने जैसे खतरे भी सामने आएंगे. जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो के दौरान महासागरों से निकलने वाली ऊष्मा पूरी धरती पर भयंकर असर दिखाती है, जिससे वैश्विक जनजीवन और पारिस्थितिकी प्रभावित होगी.

रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का खतरा 

इतिहास गवाह है कि 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में अल नीनो के कारण भीषण गर्मी पड़ी थी. अब वैज्ञानिकों को डर है कि 2026 और 2027 अब तक के सबसे गर्म साल साबित हो सकते हैं. हालांकि 2024 के रिकॉर्ड टूटने पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. लेकिन 2027 के लिए संभावनाएं बहुत प्रबल हैं. ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के कारण हमारी जलवायु प्रणाली अब इतनी सक्षम नहीं रही कि वह अल नीनो की अतिरिक्त ऊष्मा को सोख सके.