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वंदे मातरम के अपमान पर होगी सख्त कार्रवाई, संसद के मानसून सत्र में कई अहम विधेयक लाने की तैयारी

संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है. इनमें राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने वाला संशोधन विधेयक प्रमुख है.

ANI
Shanu Sharma

केंद्र सरकार आगामी संसद सत्र में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश करने की तैयारी कर रही है. इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने वालों के खिलाफ स्पष्ट और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है.

विधेयक के कानून बनने के बाद राष्ट्रीय गीत का अपमान भी राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय गान और संविधान के अपमान की तरह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आ जाएगा. इससे राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े कानूनी प्रावधान और अधिक मजबूत होंगे.

गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के बाद आया प्रस्ताव

गृह मंत्रालय द्वारा जारी हालिया दिशानिर्देशों के बाद यह कदम उठाया जा रहा है. इन निर्देशों के अनुसार जिन आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान जन गण मन प्रस्तुत किया जाता है, वहां राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का गायन या वादन भी अनिवार्य किया गया है. सरकारी सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े इस संशोधन विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही मंजूरी दे चुका है. अब इसे संसद के दोनों सदनों से पारित कराने की तैयारी की जा रही है.


सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक भी संसद में पेश करेगी. इस प्रस्ताव के तहत दो वर्ष से अधिक की देरी से दर्ज कराए जाने वाले जन्म और मृत्यु के मामलों में पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर ही संभव होगा. सरकार का मानना है कि इस बदलाव से फर्जी दस्तावेज तैयार करने की संभावना कम होगी और नागरिक अभिलेखों की विश्वसनीयता बढ़ेगी. 

सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी न्यायाधीशों की संख्या?

मानसून सत्र में सरकार सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक भी पेश करेगी. इस विधेयक के जरिए उस अध्यादेश को संसद की मंजूरी दिलाई जाएगी, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की गई है. सरकार का कहना है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और सर्वोच्च न्यायालय की कार्यक्षमता में सुधार होगा. 20 जुलाई से शुरू होने वाला संसद का मानसून सत्र कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों के कारण खास माना जा रहा है.