बंगाल के बाद दिल्ली में भी हलचल! TMC में एक और बगावत की आहट से ममता बनर्जी के सामने नई चुनौती

पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद टीएमसी के भीतर सांसदों की संभावित नाराजगी को लेकर चर्चाएं तेज हैं. चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

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Km Jaya

नई दिल्ली: ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पश्चिम बंगाल असेंबली में तृणमूल कांग्रेस में बड़ी फूट के बाद पार्टी MPs में बेचैनी बढ़ गई है. चर्चा है कि असेंबली के बाद लोकसभा और राज्यसभा में भी बगावत के सुर सुनाई दे सकते हैं. यही वजह है कि पार्टी लीडरशिप डैमेज कंट्रोल में पूरी तरह एक्टिव हो गई है.

दरअसल रीताब्रत बनर्जी की लीडरशिप में करीब 60 MLAs के टूटने के बाद TMC पहली बार इतने बड़े अंदरूनी संकट से जूझती दिख रही है. असेंबली में यह बगावत इतनी बड़ी थी कि स्पीकर ने रीताब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता भी मान लिया. 

MP सुखेंदु शेखर रॉय ने क्या कहा?

रिपोर्ट के मुताबिक राज्यसभा MP सुखेंदु शेखर रॉय ने भी खुलकर यह आशंका जताई है. उन्होंने कहा कि इतने कम समय में जिस बड़ी संख्या में MLA पार्टी छोड़कर गए हैं, उसका हाल लोकसभा जैसा हो सकता है. हालांकि उन्होंने राज्यसभा को लेकर कोई साफ भविष्यवाणी नहीं की, लेकिन इतना जरूर कहा कि ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

MP सौगत रॉय का क्या है कहना?

दूसरी ओर TMC के सीनियर MP सौगत रॉय ने पार्टी में किसी भी बड़ी टूट के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उनका आरोप है कि BJP पार्लियामेंट में भी वही हथकंडे दोहराने की कोशिश कर रही है, जो उसने बंगाल असेंबली में किए थे. हालांकि उन्हें भरोसा है कि ममता बनर्जी पहले भी ऐसे कई मुश्किल हालात से सफलतापूर्वक उबर चुकी हैं और इस बार भी मजबूती से वापसी करेंगी.

क्या रहा सबसे ज्यादा चर्चा का विषय?

सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बारासात की MP काकोली घोष दस्तीदार हैं. पार्टी के अंदर उनकी नाराजगी पहले भी चर्चा में रही है. लोकसभा में चीफ व्हिप के पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने कई बार लीडरशिप से अपनी नाराजगी जाहिर की है. इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में उनके नाम की चर्चा हो रही है, हालांकि उन्होंने खुद किसी बगावत की पुष्टि नहीं की है.

सूत्रों का कहना है कि हालात को संभालने के लिए ममता बनर्जी ने पिछले दो दिनों में कई नाराज MLA और MP से पर्सनली बात की है. पार्टी मामले को बढ़ने से पहले सुलझाने की कोशिश कर रही है. पार्लियामेंट में अपने दो सबसे भरोसेमंद MP को दूसरे सहयोगी दलों से लगातार संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है.