ममता के लिए सौरव गांगुली ने यूसुफ पठान से मांगा इस्तीफा? अब 'दादा' ने बताया परदे के पीछे का सच
पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली ने उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने ममता बनर्जी के लिए बहरामपुर लोकसभा सीट खाली कराने के वास्ते सांसद यूसुफ पठान से संपर्क किया था.
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में इन दिनों अटकलों का बाजार बेहद गर्म है. राज्य के हालिया विधानसभा चुनाव में अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी सुवेंदु अधिकारी के हाथों अपनी पारंपरिक सीट गंवाने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. इसी बीच एक बंगाली दैनिक समाचार पत्र की सनसनीखेज रिपोर्ट ने राज्य में हलचल पैदा कर दी, जिसमें भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का नाम घसीटा गया. हालांकि, शनिवार को गांगुली ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया.
दरअसल, विवाद की मुख्य वजह वह प्रकाशित रिपोर्ट है जिसमें दावा किया गया था कि विधानसभा चुनाव में शिकस्त के बाद ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए उपचुनाव के रास्ते संसद पहुंचने की योजना बना रही हैं. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नजर मुर्शिदाबाद जिले की बेहद सुरक्षित मानी जाने वाली बहरामपुर लोकसभा सीट पर है. इस सीट से पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान फिलहाल मौजूदा सांसद हैं, जिन्होंने साल 2024 के चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को पटखनी दी थी.
बहरामपुर सीट पर टीएमसी की रणनीतिक नजर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, टीएमसी बहरामपुर को ममता बनर्जी के लिए सबसे सुरक्षित चुनावी मैदान मान रही थी. इस क्षेत्र की कुल आबादी में लगभग 50 से 52 प्रतिशत हिस्सेदारी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत वोट बैंक माने जाते हैं. अखबार का दावा था कि इसी समीकरण को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने यूसुफ पठान को इस्तीफा देने के लिए मनाने की योजना बनाई थी, ताकि खाली हुई इस सीट पर ममता बनर्जी चुनाव लड़कर लोकसभा जा सकें.
यूसुफ पठान को मनाने में गांगुली के इस्तेमाल का दावा
इस पूरी पटकथा में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब रिपोर्ट में कहा गया कि यूसुफ पठान को इस्तीफा देने के लिए राजी करने वास्ते टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व ने सौरव गांगुली की मदद ली थी. दावा किया गया कि गांगुली को इसलिए चुना गया ताकि वे खेल जगत के पुराने संबंधों का हवाला देकर पठान तक 'दीदी' का यह खास संदेश पहुंचा सकें. इस कूटनीतिक मध्यस्थता की खबर ने बंगाल के खेल और राजनीतिक जगत दोनों को हैरान कर दिया था.
तृणमूल संसदीय दल में बगावत के सुर और गांगुली की सफाई
यह सनसनीखेज रिपोर्ट ऐसे नाजुक समय में सामने आई है जब तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के करीब 23 लोकसभा सांसद इस समय रताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के सीधे संपर्क में हैं. इस चौतरफा राजनीतिक दबाव के बीच सौरव गांगुली ने शनिवार को एक विस्तृत और कड़ा बयान जारी किया. उन्होंने इन सभी दावों को पूरी तरह मनगढ़ंत और सच्चाई से कोसों दूर बताते हुए इस पूरे विवाद पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया.