'डील करनी होती तो 26 दिन भूखा क्यों रहता?' आरोपों पर फूट पड़ा सोनम वांगचुक का गुस्सा
26 दिनों का अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने सरकार से समझौते के आरोपों को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा कि यदि कोई समझौता करना होता तो वह इतने लंबे समय तक भूख हड़ताल पर नहीं रहते.
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के बाद उठ रहे सवालों पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके आंदोलन का उद्देश्य किसी तरह की राजनीतिक सौदेबाजी नहीं था. साथ ही उन्होंने आलोचकों से पूरे घटनाक्रम को संवेदनशीलता के साथ देखने की अपील भी की.
डील के आरोपों पर दिया स्पष्ट जवाब
सोनम वांगचुक ने शुक्रवार देर रात जारी वीडियो संदेश में उन आरोपों पर नाराजगी जताई, जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने सरकार से किसी समझौते के बाद अपना अनशन समाप्त किया. उन्होंने कहा कि यदि उनका मकसद कोई डील करना होता तो वह लगातार 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर नहीं रहते. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इतना लंबा त्याग करने के बाद भी उनकी नीयत पर शक किया जाना उचित है. वांगचुक ने कहा कि उनके आंदोलन का उद्देश्य केवल छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाना था.
जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद खत्म किया अनशन
सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद अपना अनशन समाप्त किया था. इसके बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. कुछ लोगों ने उनके फैसले का स्वागत किया, जबकि कई लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर उन्होंने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय क्यों लिया. इसी विवाद के बीच वांगचुक ने वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि उनके फैसले को गलत तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए.
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पत्नी ने भी आलोचकों को दिया जवाब
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर आलोचकों से संयम बरतने की अपील की. उन्होंने बताया कि 26 दिनों के अनशन के कारण वांगचुक का लगभग 11 किलो वजन कम हो गया है और फिलहाल उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के त्याग और संघर्ष को समझे बिना उस पर राजनीतिक टिप्पणी करना उचित नहीं है. उनके अनुसार वांगचुक ने निजी सुविधा से अधिक अपने उद्देश्य को महत्व दिया.
स्वास्थ्य और आंदोलन दोनों पर बनी नजर
वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है. डॉक्टरों की देखरेख में उनका उपचार जारी है. दूसरी ओर उनके समर्थक उम्मीद जता रहे हैं कि आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर आगे सकारात्मक समाधान निकलेगा. वहीं विरोधी पक्ष अब भी उनके फैसले पर सवाल उठा रहा है. इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है और वांगचुक का वीडियो संदेश चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है.