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पहलगाम आतंकवादियों के BJP में शामिल होने' वाले बयान पर भड़की बीजेपी, संजय राउत की हुई जमकर आलोचना

संजय राउत के बयान ने एक बार फिर राजनीतिक विवाद को हवा दी है. उधर, बीजेपी ने इसे सशस्त्र बलों का अपमान करार दिया, जबकि राउत ने केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाए हैं.

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Mayank Tiwari

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के पहलगाम हमले के आतंकवादियों को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. दरअसल, संजय राउत ने शुक्रवार (30 मई) को दावा किया था कि पहलगाम के छह आतंकवादी अभी तक पकड़े नहीं गए हैं, क्योंकि "शायद वे बीजेपी में शामिल हो गए हैं।" इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा दिया है.

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में संजय राउत ने कहा, "शायद आतंकवादी बीजेपी में शामिल हो गए हैं, इसलिए उन्हें पकड़ा नहीं जा रहा है. पहलगाम के छह आतंकवादी अब तक नहीं पकड़े गए, शायद एक दिन बीजेपी कार्यालय से प्रेस नोट आएगा कि वे छह लोग बीजेपी में शामिल हो गए हैं. तो, सब कुछ भूल जाइए. इस बयान ने बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं में आक्रोश पैदा कर दिया है.

संजय राउत के बयान पर BJP ने दिया करारा जवाब

बीजेपी नेता राम कदम ने एक समाचार चैनल पर राउत के बयान को "बिल्कुल हास्यास्पद" करार देते हुए इसे भारतीय सशस्त्र बलों का अपमान बताया. उन्होंने कहा, "यह एकदम बेतुका बयान है और हमारे सशस्त्र बलों का अपमान है." वहीं, शिवसेना के नेता संजय निरुपम ने भी राउत की टिप्पणी पर निशाना साधते हुए कहा, "शिवसेना-यूबीटी के नेता हताशा में इस तरह के बयान दे रहे हैं.

ऑपरेशन सिंदूर पर राउत का केंद्र पर हमला

संजय राउत ने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर ऑपरेशन सिंदूर को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि सरकार भारतीय सशस्त्र बलों की कार्रवाई का श्रेय लेने की होड़ में है.राउत ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर की राजनीति देश के प्रधानमंत्री हर राज्य में जाकर कर रहे हैं. यह ऑपरेशन हमारे सैनिकों ने किया, लेकिन इसका श्रेय लेने की होड़ में हमारे प्रधानमंत्री सबसे आगे हैं. कोई भी जाकर किसी को सिंदूर का पवित्र प्रथा नहीं दे सकता. अगर आप बीजेपी कार्यकर्ताओं को महिलाओं के पास भेजते हैं, तो यह सिंदूर का अपमान है.

विपक्ष का एकजुट प्रयास

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने यह भी घोषणा की कि विपक्षी दल एकजुट होकर ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष सत्र की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "विपक्ष के लोग एक बार फिर सामने आए हैं, और हम राहुल गांधी के नेतृत्व में एक विशेष सत्र के लिए सभी के हस्ताक्षर के साथ पत्र दे रहे हैं.