बालासाहेब की जन्मशती पर शिंदे सेना ने मांगा BMC का मेयर पद, क्या मान जाएगी बीजेपी?
बीएमसी चुनाव में महायुति की जीत के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने साफ किया कि जहां-जहां गठबंधन जीता है, वहां मेयर भी महायुति का होगा. बालासाहेब ठाकरे जन्मशती को उन्होंने इसे सच्ची श्रद्धांजलि बताया.
नई दिल्ली: मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के मेयर की मांग को भावनात्मक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से अहम बताया है. उनका कहना है कि बालासाहेब ठाकरे के जन्मशती वर्ष में शिवसेना का मेयर बनना कार्यकर्ताओं की भावना है. बीएमसी में बीजेपी-शिवसेना महायुति को स्पष्ट जनादेश मिला है, जिसे नेतृत्व का आधार बनाया जा रहा है.
बीएमसी चुनाव नतीजों में बीजेपी ने 89 और शिवसेना ने 29 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है. एकनाथ शिंदे ने कहा कि मुंबई सहित जिन नगर निगमों में महायुति ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा है, वहां मेयर भी गठबंधन से ही होगा. उन्होंने कहा कि यह जनता के फैसले का सम्मान है और इसमें किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए.
बालासाहेब जन्मशती से जुड़ी भावना
शिंदे ने जोर देकर कहा कि 23 जनवरी से बालासाहेब ठाकरे का जन्मशती वर्ष शुरू हो रहा है. इस ऐतिहासिक मौके पर शिवसैनिक चाहते हैं कि देश की सबसे समृद्ध नगर निगम का नेतृत्व शिवसेना के पास हो. उन्होंने इसे केवल सत्ता का सवाल नहीं बल्कि बालासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि बताया, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
मेयर पद पर सहमति की बात
हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि शिंदे गुट पहले ढाई साल के लिए शिवसेना का मेयर चाहता है, लेकिन शिंदे ने साफ किया कि अंतिम फैसला बीजेपी और शिवसेना आपसी सहमति से करेंगे. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना यूबीटी के साथ किसी नए राजनीतिक समीकरण की कोई गुंजाइश नहीं है.
पार्षदों को होटल में रखने पर विवाद
बीएमसी चुनाव के बाद शिवसेना के 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को एक होटल में ठहराए जाने से सियासी बयानबाजी तेज हो गई. उद्धव ठाकरे ने इसे डर की राजनीति बताया. वहीं शिंदे गुट का कहना है कि यह केवल नगर निगम की कार्यप्रणाली और नियमों पर आधारित एक ओरिएंटेशन वर्कशॉप है, न कि किसी तरह की राजनीतिक घेराबंदी.
विपक्ष और गठबंधन की जुबानी जंग
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि मुंबई का अगला मेयर महायुति से ही होगा और इसके लिए विपक्ष के वोटों की जरूरत नहीं है. दूसरी ओर यूबीटी प्रवक्ता हर्षल प्रधान ने सत्ता पक्ष को सत्ता का भूखा करार दिया. मेयर चुनाव की तारीख को लेकर भी खींचतान जारी है, जो आने वाले दिनों में राजनीति को और गरमाएगी.