पाकिस्तान की पोल खोलने US रवाना हुए शशि थरूर, पांडा की अगुवाई में डेलिगेशन सऊदी अरब निकली

दिल्ली हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में शशि थरूर ने इस मिशन को 'शांति और उम्मीद का मिशन' करार दिया. उन्होंने कहा कि हमें अपने देश और आतंकवाद के खिलाफ हमारी प्रतिक्रिया के लिए आवाज उठानी होगी. हम विश्व को यह संदेश देना चाहते हैं कि भारत चुपचाप आतंकवाद का दंश नहीं सहेगा, बल्कि उसका जवाब देगा.

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Gyanendra Sharma

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई, जिसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट कर 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया. इस सटीक और प्रभावी सैन्य कार्रवाई के बाद अब भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को बेनकाब करने के लिए एक ऐतिहासिक कूटनीतिक कदम उठाया है. इसी कड़ी में शुक्रवार (23 मई 2025) की रात दो सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल विदेश दौरे के लिए रवाना हुए. 

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका, पनामा, गुयाना, ब्राजील और कोलंबिया की यात्रा के लिए उड़ान भरी. वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बैजयंत पांडा के नेतृत्व में एक अन्य दल सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और अल्जीरिया जैसे खाड़ी देशों के लिए रवाना हुआ. इन सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सदस्य देशों सहित 25 से अधिक प्रभावशाली देशों में भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को रेखांकित करना और पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को विश्व समुदाय के सामने उजागर करना है.

शशि थरूर का संदेश

दिल्ली हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में शशि थरूर ने इस मिशन को 'शांति और उम्मीद का मिशन' करार दिया. उन्होंने कहा कि हमें अपने देश और आतंकवाद के खिलाफ हमारी प्रतिक्रिया के लिए आवाज उठानी होगी. हम विश्व को यह संदेश देना चाहते हैं कि भारत चुपचाप आतंकवाद का दंश नहीं सहेगा, बल्कि उसका जवाब देगा. हम नहीं चाहते कि दुनिया आतंकवाद से इसलिए मुंह मोड़ ले, क्योंकि यह सिर्फ भारत की समस्या है. हम उदासीनता को सच्चाई पर हावी नहीं होने देंगे. हम वहां जाकर लोगों को बताएंगे कि हमने पिछले कई वर्षों से क्या झेला है, हमने जो किया वह क्यों किया, और भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख क्या होगा.

ऑपरेशन सिंदूर: आतंक के खिलाफ निर्णायक कदम

'ऑपरेशन सिंदूर' केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह भारत की नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का प्रतीक था, जिसमें संयम और सख्ती का संतुलन दिखाई देता है. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने सुनिश्चित किया कि किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को नुकसान न पहुंचे, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय नियमों और संप्रभुता के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई. यह कार्रवाई पहलगाम हमले के जवाब में थी, जिसमें आतंकवादियों ने निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया था. ऑपरेशन ने विश्व को यह संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक और सटीक कार्रवाई करने में सक्षम है.

वैश्विक मंच पर भारत की एकजुटता

इस कूटनीतिक पहल में विभिन्न दलों के 51 सांसद, पूर्व मंत्री और 8 पूर्व राजदूत शामिल हैं, जो 10 दिनों तक विश्व के प्रमुख देशों में भारत का पक्ष रखेंगे. इन प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व शशि थरूर, रविशंकर प्रसाद, संजय झा, बैजयंत पांडा, कनिमोझी करुणानिधि, सुप्रिया सुले और श्रीकांत शिंदे जैसे प्रमुख नेता कर रहे हैं.