एयर इंडिया ने यात्रियों की जिंदगी से किया खिलवाड़, एक्सपायर सर्टिफिकेट के साथ 30 दिनों तक भरी उड़ान

टाटा समूह की स्वामित्व वाली एयर इंडिया हाल ही में एक गंभीर सुरक्षा मामले में फंस गई है. खबरों के अनुसार, एयर इंडिया ने एक ऐसा विमान उड़ाया, जिसकी 'एयरवर्थिनेस' यानी उड़ान की योग्यता का प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) एक्सपायर हो चुका था.

Anuj

नई दिल्ली: टाटा समूह की स्वामित्व वाली एयर इंडिया हाल ही में एक गंभीर सुरक्षा मामले में फंस गई है. खबरों के अनुसार, एयर इंडिया ने एक ऐसा विमान उड़ाया, जिसकी 'एयरवर्थिनेस' यानी उड़ान की योग्यता का प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) एक्सपायर हो चुका था.

DGCA ने जांच शुरू की

24 और 25 नवंबर को 164-सीटर एयरबस A320 विमान ने आठ बार उड़ान भरी, जबकि इसका एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेट वैध नहीं था. यह मामला तब सामने आया जब एक इंजीनियर ने इस अनियमितता को नोटिस किया. इसके बाद तुरंत इस विमान को सेवा से हटा दिया गया और DGCA यानी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने जांच शुरू कर दी.

एयर इंडिया पर जुर्माना लगने की संभावना

DGCA द्वारा जारी एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेट यह सुनिश्चित करता है कि विमान का नियमित रखरखाव हुआ है और वह उड़ान भरने के लिए पूरी तरह सुरक्षित है. बिना वैध सर्टिफिकेट वाला विमान उड़ाना गंभीर अपराध माना जाता है. सरकारी अधिकारियों के अनुसार, एयर इंडिया पर भारी जुर्माना लगने की संभावना है और इसमें वरिष्ठ अधिकारियों का निलंबन भी शामिल हो सकता है. एयर इंडिया ने भी उन सभी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, जो इस विमान को एक्सपायर सर्टिफिकेट के साथ उड़ाने के फैसले में शामिल थे. फिलहाल, यह A320 विमान DGCA की जांच पूरी होने तक ग्राउंडेड है.

बीमा कवरेज अमान्य होगा

इस घटना से एयर इंडिया को बीमा संबंधी समस्याएं भी झेलनी पड़ सकती हैं. एक्सपायर सर्टिफिकेट के साथ विमान उड़ाने पर बीमा कवरेज अमान्य हो सकता है. एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि बिना यह सुनिश्चित किए कि विमान हवा में उड़ने के लिए प्रमाणित है, इसका संचालन करना यात्रियों की सुरक्षा को सीधे खतरे में डालता है. यह एयरलाइन की सुरक्षा संस्कृति पर सवाल उठाता है. हालांकि, DGCA समय-समय पर निरीक्षण करता है, लेकिन विमान को एयरवर्थी बनाए रखना एयरलाइन की जिम्मेदारी है.

'DGCA को सूचित किया'

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि जैसे ही उन्हें इस मामले की जानकारी मिली, उन्होंने DGCA को सूचित कर दिया और आंतरिक जांच शुरू कर दी. वरिष्ठ इंजीनियरों का कहना है कि आधुनिक सॉफ्टवेयर और CAMO (कंटीन्यूइंग एयरवर्थिनेस मैनेजमेंट ऑर्गनाइजेशन) के जरिए सर्टिफिकेट रिन्यू और रखरखाव के कामों में चूक लगभग असंभव है. आमतौर पर एयरलाइन अपने एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेट को समय से तीन महीने पहले रिन्यू कर देती है और रात में विमान पार्क करने से पहले इंजीनियर दस्तावेजों की जांच करता है.

सुरक्षा पर गंभीर सवाल

इस विमान के एक्सपायर सर्टिफिकेट के साथ आठ बार उड़ने की घटना ने एयर इंडिया की सुरक्षा संस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. DGCA इसे लेवल 1 उल्लंघन के रूप में दर्ज कर सकती है, जो उड़ान सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. इससे पहले भी एयरलाइन को पुराने या एक्सपायर हुए विमान पुर्जों के इस्तेमाल के कारण कारण बताओ नोटिस मिल चुके हैं. इस मामले में CEO कैम्पबेल विल्सन और इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे.