जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन भ्रटाचार और सिस्टम की नाकामी का परिणाम: RSS

RSS की समन्वय बैठक में पेपर लीक, जनसंख्या संतुलन, नशाखोरी और AI के प्रभाव पर चर्चा हुई. संघ ने परीक्षा व्यवस्था सुधारने और युवाओं से संवाद बढ़ाने पर जोर दिया.

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Sagar Bhardwaj

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंदा ने कहा कि अखिल भारतीय समन्वय बैठक में पेपर लीक और उससे जुड़े युवा आंदोलनों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में यह बात सामने आई कि पेपर लीक की समस्या के कारण जंतर-मंतर पर युवाओं का प्रदर्शन व्यवस्था की खामियों और सिस्टम की नाकामी का परिणाम था. संघ ने परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने की जरूरत बताई.

 326 प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

समन्वय बैठक में कुल 326 प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें से 306 ने भाग लिया. इनमें 49 महिला प्रतिनिधि भी शामिल थीं. बैठक में देश से जुड़े सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के कई विषयों पर विचार-विमर्श किया गया. संघ ने कहा कि युवाओं की चिंताओं को समझने और उन्हें समाधान की प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता है.

जनसंख्या संतुलन पर भी चर्चा

बैठक में देश में बदलते जनसांख्यिकीय स्वरूप पर भी मंथन हुआ. संघ के अनुसार, बुजुर्ग आबादी का अनुपात बढ़ रहा है, जबकि युवाओं में प्रजनन दर में गिरावट देखी जा रही है. इससे भविष्य में सामाजिक और आर्थिक स्तर पर कई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं. बैठक में सामाजिक संतुलन और सद्भाव बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की गई.


नशाखोरी रोकने के लिए सामूहिक प्रयास

देश में बढ़ती नशाखोरी की प्रवृत्ति को लेकर भी बैठक में गंभीर चिंता जताई गई. संघ ने कहा कि सरकार और सामाजिक संगठनों को इस चुनौती से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए. अलग-अलग स्तर पर चल रहे प्रयासों को आपस में जोड़कर अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत बताई गई, ताकि युवाओं को नशे से दूर रखने के साथ समाज में जागरूकता बढ़ाई जा सके.

AI के फायदे और नुकसान पर मंथन

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर भी प्रतिनिधियों ने चर्चा की. बैठक में तकनीक के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर विचार किया गया. संघ ने AI के उपयोग से समाज को मिलने वाले लाभों को बढ़ाने और इसके संभावित दुष्प्रभावों से निपटने के लिए जागरूकता तथा जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया.

युवाओं से संवाद बढ़ाने पर जोर

संघ ने कहा कि केवल विरोध या प्रदर्शन से समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकलता, बल्कि व्यवस्था में सुधार जरूरी है. NEET समेत अन्य परीक्षाओं की कमियों को दूर करने और युवाओं का भरोसा कायम करने पर जोर दिया गया. मुकुंदा ने कहा कि भारत में करीब 35 करोड़ युवा हैं और उनके साथ व्यापक संवाद तथा उन्हें सामाजिक गतिविधियों में शामिल करना जरूरी है. संघ का मानना है कि देश का भविष्य युवाओं के साथ सुरक्षित है.