फेमस इकोलॉजिस्ट माधव गाडगिल का निधन, जानें इन्हें क्यों कहा जाता था 'धरती पुत्र'

जाने-माने इकोलॉजिस्ट माधव गाडगिल का बुधवारो की देर रात निधन हो गया. इस बात की जानकारी देते हुए उनके बेटे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर किया है. उन्होंंने बताया कि उनके पिता लंबे समय से बीमार थे.

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Shanu Sharma

नई दिल्ली: पश्चिमी घाट पर अपने शुरुआती काम के लिए मशहूर जाने-माने इकोलॉजिस्ट माधव गाडगिल का बुधवार देर रात पुणे में निधन हो गया. उनके बेटे सिद्धार्थ गाडगिल ने इस बात की सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से दिया है. उन्होंने बताया कि उनके पिता कुछ समय से बीमार चल रहे थे. 

सिद्धार्थ गाडगिल ने सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी देते हुए लिखा कि मुझे यह दुखद खबर देते हुए बहुत दुख हो रहा है कि मेरे पिता, माधव गाडगिल का कल रात पुणे में निधन हो गया. उन्होंने आगे लिखा कि वह कुछ समय से बीमार थे, जिसके बाद कल रात उनका निधन हो गया.

माधव गाडगिल कौन थे?

पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में माधव गाडगिल एक बड़ी हस्ती हैं. उन्होंने भारत के इकोलॉजिकल विमर्श को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट, खासकर पश्चिमी घाट के संबंध में विशेष काम किया है. वह एक प्रतिष्ठित इकोलॉजिस्ट, शिक्षाविद और सार्वजनिक बुद्धिजीवी थे. जो बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन , सस्टेनेबल डेवलपमेंट और लोगों पर केंद्रित पर्यावरण शासन पर अपने काम के लिए सबसे ज़्यादा जाने जाते थे. कई दशकों के अपने करियर में, उन्होंने कठोर वैज्ञानिक अनुसंधान को नीतिगत वकालत के साथ जोड़ा. साथ ही उन्होंने अक्सर विकास और पारिस्थितिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया.

पेंगुइन के अनुसार, जिसने 2023 में उनकी आत्मकथा 'ए वॉक अप द हिल: लिविंग विद पीपल एंड नेचर' प्रकाशित की गई थी. जिसमें बताया गया कि गाडगिल ने हाई स्कूल में ही एक फील्ड इकोलॉजिस्ट और मानवविज्ञानी के रूप में करियर बनाने का फैसला ले लिया था. इसके लिए उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मैथमेटिकल इकोलॉजी में डॉक्टरेट अनुसंधान पूरा की. 1969 में उन्हें PhD मिली और उन्हें IBM से फेलोशिप मिली, जिससे उन्होंने हार्वर्ड कंप्यूटिंग सेंटर में रिसर्च फेलो के रूप में अपना काम जारी रखें. साथ ही दो साल तक यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी के लेक्चरर के रूप में भी काम किया.

इन पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित 

गाडगिल को अपने वैज्ञानिक कार्य, सार्वजनिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता के लिए कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिले. 2024 में, संयुक्त राष्ट्र ने गाडगिल को प्रतिष्ठित 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके अलावा उन्हें पद्म श्री, शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है.