'अभी तो दर्द शुरू हुआ है', राहुल गांधी ने सदन में उठाया LPG गैस संकट का मुद्दा
राहुल गांधी ने सदन में कहा, 'यह तो बस शुरुआत है. रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं, लोगों में गैस सिलेंडर को लेकर डर है और सड़क किनारे खाना बेचने वाले गरीब विक्रेता सबसे ज्यादा मारे जा रहे हैं.'
संसद के इस सत्र में गुरुवार का दिन खासा हंगामेदार रहा. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा में देश में फैली रसोई गैस (एलपीजी) की कमी की समस्या को जोरदार तरीके से उठाया. उन्होंने कहा कि आम आदमी की मुश्किलें अभी शुरू ही हुई हैं और सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत ध्यान देना चाहिए.
संसद के अंदर और बाहर प्रदर्शन
राहुल गांधी ने सदन में कहा, "यह तो बस शुरुआत है. रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं, लोगों में गैस सिलेंडर को लेकर डर है और सड़क किनारे खाना बेचने वाले गरीब विक्रेता सबसे ज्यादा मारे जा रहे हैं." उन्होंने इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी देश की मजबूती उसके ऊर्जा संसाधनों पर टिकी होती है. इससे पहले सुबह विपक्षी सांसदों ने संसद भवन के बाहर जोरदार नारेबाजी की. उन्होंने नारा लगाया - "नरेंदर भी गायब, सिलेंडर भी गायब", जिससे सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की गई.
सदन में अध्यक्ष का हस्तक्षेप और हंगामा
जैसे ही राहुल गांधी ने अपनी बात रखनी शुरू की, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर एपस्टीन को लेकर कुछ टिप्पणी भी कर दी. इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें टोकते हुए कहा कि जिस विषय पर चर्चा की अनुमति ली गई है, केवल उसी पर बात करें. अध्यक्ष के यह कहते ही विपक्षी सांसद हंगामा करने लगे. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अध्यक्ष ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को जवाब देने के लिए बुलाया लेकिन जैसे ही मंत्री जी बोलने लगे, विपक्ष की ओर से जोरदार नारेबाजी शुरू हो गई, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, विपक्ष का आरोप है कि देश के कई हिस्सों में रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत हो गई है. आम जनता को सिलेंडर के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. राहुल गांधी ने इसी मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर संसद में नोटिस दिया था. हालांकि, जब वह बोल रहे थे, तो उनके बयान में पेट्रोलियम मंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी शामिल हो गई, जिसके कारण सदन में तनाव बढ़ गया.