नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मनरेगा का नाम बदलने को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर किया.
राहुल गांधी ने लिखा कि मोदी जी को दो चीजों से पक्की नफरत है- महात्मा गांधी के विचारों से और गरीबों के अधिकारों से. मनरेगा, महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज के सपने का जीवंत रूप है. करोड़ों ग्रामीणों की जिंदगी का सहारा है, जो कोविड काल में उनका आर्थिक सुरक्षा कवच भी साबित हुआ. मगर, प्रधानमंत्री मोदी को यह योजना हमेशा खटकती रही और पिछले दस सालों से इसे कमजोर करने की कोशिश करते रहे हैं. आज वो मनरेगा का नामो-निशान मिटाने पर आमादा है.
Modi ji has a deep dislike for two things - the ideas of Mahatma Gandhi and the rights of the poor.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) December 16, 2025
MGNREGA is the living embodiment of Mahatma Gandhi’s vision of Gram Swaraj. It has been a lifeline for millions of rural Indians and proved to be a crucial economic safety net…
1. रोजगार का अधिकार - जो भी काम मांगेगा, उसे काम मिलेगा
2. गांव को प्रगति कार्य खुद तय करने की स्वतंत्रता
3. केंद्र सरकार मज़दूरी का पूरा खर्च और समान की लागत का 75% देगी
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आगे कहा कि अब प्रधानमंत्री मोदी इसी मनरेगा को बदलकर सारी ताकत सिर्फ अपने हाथों में केंद्रित करना चाहते हैं.
1. बजट, योजनाएं और नियम केंद्र तय करेगा
2. राज्यों को 40% खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जाएगा
3. बजट खत्म होते ही या फसल कटाई के मौसम में दो महीने तक किसी को काम नहीं मिलेगा
यह नया बिल महात्मा गांधी के आदर्शों का अपमान है. मोदी सरकार ने पहले ही भयंकर बेरोजगारी से भारत के युवाओं का भविष्य तबाह कर दिया है और अब ये बिल ग्रामीण गरीबों की सुरक्षित रोजी-रोटी को भी खत्म करने का जरिया है. हम इस जनविरोधी बिल का गांव की गलियों से संसद तक विरोध करेंगे.
इससे पहले लोकसभा में प्रियंका गांधी ने नियम 72(1) के तहत G Ram G बिल का विरोध दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि मनरेगा पिछले 20 वर्षों से ग्रामीण भारत को रोजगार और आर्थिक मजबूती दे रहा है. यह कानून गरीबों को साल में 100 दिन का सुनिश्चित रोजगार देता है और इसकी सफलता पर कभी सवाल नहीं उठे.
प्रियंका गांधी ने कहा कि मनरेगा की सबसे बड़ी ताकत इसकी मांग आधारित व्यवस्था है, जिसमें काम की जरूरत गांव तय करते हैं. नए बिल में फंडिंग पहले से तय होगी, जिससे जमीनी जरूरतें नजरअंदाज होंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामसभाओं की ताकत भी इस बिल में कम की जा रही है.
वहीं, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि वे ‘जी राम जी’ नाम वाले इस विधेयक का विरोध करते हैं. उनका कहना था कि महात्मा गांधी का राम राज्य का विचार किसी राजनीतिक एजेंडे से जुड़ा नहीं था, बल्कि वह समाज को बेहतर बनाने की सोच थी. गांधी जी चाहते थे कि गांव मजबूत बने और समाज में बराबरी हो. ऐसे में उनके नाम को इस योजना से हटाना गलत और नैतिक रूप से अनुचित है. उन्होंने एक पुरानी पंक्ति का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि 'देखो ओ दिवानों ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम ना करो'.
आपको बता दें कि लोकसभा में मनरेगा से जुड़ा एक नया विधेयक पेश किया गया है, जिसमें इस योजना का नाम बदलने का प्रस्ताव है. सरकार मनरेगा का नाम बदलकर 'विकसित भारत- जी राम जी' योजना रखने की तैयारी में है. इस मुद्दे पर संसद में जोरदार बहस देखने को मिली.