भारत, अमेरिका, फ्रांस, इटली...विरोध प्रदर्शनों की आग में क्यों जल रही है दुनिया, किस बात से नाराज है जनता?

अन्य देशों के साथ भारत भी कई मुद्दों को लेकर पिछले कुछ महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है.

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Sagar Bhardwaj

दुनिया के कई देशों में इस समय लोगों के असंतोष और गुस्से का नया दौर देखने को मिल रहा है. भारत, फ्रांस, इटली, अमेरिका सभी महंगाई, बेरोजगारी और आवास संकट को लेकर लोगों के गुस्से का सामना कर रहे हैं. इन देशों में जनता सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है.

फ्रांस, इटली, अल्बानिया, अर्जेंटीना और तुर्किए में लोग महंगाई, बेरोजगारी और आवास संकट को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं. फ्रांस में ये प्रदर्शन राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले हो रहे हैं, जिससे वहीं की सरकार के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है.

फ्रांस में प्रदर्शन की प्रमुख वजह

फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की दो प्रमुख वजह हैं. पहली बढ़ती महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतें, दूसरा स्कूलों की बदहाल स्थिति और  शिक्षा बजट में कटौती. फ्रांस में ये छात्र आंदोलन पिछले महीने पेरिस में स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ था, जो धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया.


फ्रांस के आंतरिक मामलों के मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि घटती पर्जेजिंग पावर के खिलाफ हुए इन प्रदर्शनों में करीबल 5.5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया जिसमें पेरिस की सड़कों पर 1.10 लाख लोग उतरे थे और कई जगहों पर हिंसक झड़पें भी हुईं थीं.

अल्बानिया और तुर्किये में भी असंतोष

अल्बानिया में छात्र विश्वविद्यालयों की बदहाल स्थिति, पढ़ाई का ज्यादा खर्च और डिग्री के बाद भी रोजगार के मौकों में कमी को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. 13 अक्तूबर को तिराना में शिक्षा मंत्रालय के बाहर हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की.

तुर्किये में भी पेंशनभोगियों और मजदूर संगठनों ने अपर्याप्त पेंशन औ बढ़ती महंगाई के विरोध में पिछले महीने प्रदर्शन किए. अंकारा में संवैधानिक अदालत के बाहर जमा हुए पेंशनभोगियों ने गरिमा के साथ जिंदगी जीने के अधिकार की मांग की.

अर्जेंटीना और अमेरिका में भी उठा विरोध का सुर

लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना में शिक्षा बजट में हुई भारी कटौती को लेकर इस हफ्ते की शुरुआत में भारी विरोध प्रदर्शन हुए. राष्ट्रपति जेवियर माइली के सत्ता में आने के बाद शिक्षा बजट में कटौती को लेकर ये पांचवां बड़ा विरोध प्रदर्शन है.

अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 'नो किंग्स' नेटवर्क ने देशभर में रैलियां कीं. इसका मकसद अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनाव में लोगों को जल्दी मतदान करने के लिए प्रोत्साहित करना था. बताया जा रहा है कि यह विरोध प्रदर्शन ट्रंप की नीतियों से असंतुष्ट  लोगों के दो साल के लंबे विरोध का ही हिस्सा था.

भारत में भी विरोध प्रदर्शनों का दौर

अन्य देशों के साथ भारत भी कई मुद्दों को लेकर पिछले कुछ महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है. पहले पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ और अब वोटर लिस्ट और एसआईआर में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है. कहा यह भी जा रहा है कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खराब शिक्षा व्यवस्था भी कहीं ना कहीं इन विरोध प्रदर्शनों की बड़ी वजह हैं.