दुनिया के कई देशों में इस समय लोगों के असंतोष और गुस्से का नया दौर देखने को मिल रहा है. भारत, फ्रांस, इटली, अमेरिका सभी महंगाई, बेरोजगारी और आवास संकट को लेकर लोगों के गुस्से का सामना कर रहे हैं. इन देशों में जनता सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है.
फ्रांस, इटली, अल्बानिया, अर्जेंटीना और तुर्किए में लोग महंगाई, बेरोजगारी और आवास संकट को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं. फ्रांस में ये प्रदर्शन राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले हो रहे हैं, जिससे वहीं की सरकार के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है.
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की दो प्रमुख वजह हैं. पहली बढ़ती महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतें, दूसरा स्कूलों की बदहाल स्थिति और शिक्षा बजट में कटौती. फ्रांस में ये छात्र आंदोलन पिछले महीने पेरिस में स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ था, जो धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया.
फ्रांस के आंतरिक मामलों के मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि घटती पर्जेजिंग पावर के खिलाफ हुए इन प्रदर्शनों में करीबल 5.5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया जिसमें पेरिस की सड़कों पर 1.10 लाख लोग उतरे थे और कई जगहों पर हिंसक झड़पें भी हुईं थीं.
Humans: "AI WILL DESTROY THE WORLD." Meanwhile in France, masked protesters set the 143-year-old Limoges town hall on fire during cost of living demonstrations. The roof collapsed, the tower came down, and local officials called it a catastrophe for heritage. The building survived two world wars. It did not survive a Saturday night of people who decided burning what belongs to everyone counts as protest. Demonstrating is a right. Turning historic buildings into ash and then lecturing the rest of us about norms, values and civilised behaviour is not. The same voices that treat hypothetical AI risk as the end of everything have no problem watching actual humans erase centuries of culture in real time and call it resistance. Hypocrisy is not a bug. It is the feature.
— 🄲🅈🄽Ξ/ΛCC🄲🅈🄱🄴🅁🄾🅃🄸🅀🅄🄴 (@Cyn_Cyb3r071Qu3) October 18, 2026
बेल्जियम में सार्वजनिक खर्चों में कटौती और बढ़ते घरेलू खर्चों के बीच उच्च शिक्षा और यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाने का विरोध हो रहा है.
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने बढ़ती महंगाई, कम सैलरी और सस्ते मकान मिलने में आ रहीं मुश्किलों को लेकर मार्च निकाला. लिस्बन और कई शहरों में 2017 के बाद से संपत्तियों की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं, जबकि किराए में भी भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे कम आय वाले परिवारों और युवा कामगारों पर भारी आर्थिक दबाव आ गया है.
इटली में भी यूरोप के दूसरे हिस्सों की तरह हाल बेहाल है. मिलान में स्थिर वेतन, महंगाई और रोजमर्रा का खर्च वहन करने में आ रहीं दिक्कतों को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किए. हालांकि फ्रांस के मुकाबले इटली में विरोध प्रदर्शन छोटे थे.
⚡️CHAOS SEEN NEAR HISTORIC CATHEDRAL MILAN, ITALY 🇮🇹 Protesters clashed with police near Milan’s iconic Duomo Cathedral over the rising cost of living, high fuel prices, low wages and expensive housing. Protest is turining violent with loots & fires near the areas in Milan. #Milan #Italy #Paris #GeorgiaMeloni #DuomoCathedral
— Global News (@Jarvis945) October 18, 2026
अल्बानिया में छात्र विश्वविद्यालयों की बदहाल स्थिति, पढ़ाई का ज्यादा खर्च और डिग्री के बाद भी रोजगार के मौकों में कमी को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. 13 अक्तूबर को तिराना में शिक्षा मंत्रालय के बाहर हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की.
तुर्किये में भी पेंशनभोगियों और मजदूर संगठनों ने अपर्याप्त पेंशन औ बढ़ती महंगाई के विरोध में पिछले महीने प्रदर्शन किए. अंकारा में संवैधानिक अदालत के बाहर जमा हुए पेंशनभोगियों ने गरिमा के साथ जिंदगी जीने के अधिकार की मांग की.
लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना में शिक्षा बजट में हुई भारी कटौती को लेकर इस हफ्ते की शुरुआत में भारी विरोध प्रदर्शन हुए. राष्ट्रपति जेवियर माइली के सत्ता में आने के बाद शिक्षा बजट में कटौती को लेकर ये पांचवां बड़ा विरोध प्रदर्शन है.
वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 'नो किंग्स' नेटवर्क ने देशभर में रैलियां कीं. इसका मकसद अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनाव में लोगों को जल्दी मतदान करने के लिए प्रोत्साहित करना था. बताया जा रहा है कि यह विरोध प्रदर्शन ट्रंप की नीतियों से असंतुष्ट लोगों के दो साल के लंबे विरोध का ही हिस्सा था.
अन्य देशों के साथ भारत भी कई मुद्दों को लेकर पिछले कुछ महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है. पहले पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ और अब वोटर लिस्ट और एसआईआर में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है. कहा यह भी जा रहा है कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खराब शिक्षा व्यवस्था भी कहीं ना कहीं इन विरोध प्रदर्शनों की बड़ी वजह हैं.