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194 साल के सबसे बुजुर्ग जीवित कछुए जोनाथन से मिले पीएम मोदी, जानें सेशेल्स का दौरा क्यों है खास?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स दौरे के दौरान दुनिया के सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जीव जोनाथन कछुए से मुलाकात की. इस यात्रा का उद्देश्य भारत-सेशेल्स संबंधों को मजबूत करना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
194 साल के सबसे बुजुर्ग जीवित कछुए जोनाथन से मिले पीएम मोदी, जानें सेशेल्स का दौरा क्यों है खास?
Courtesy: social media

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सेशेल्स दौरा कई मायनों में विशेष माना जा रहा है. भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर वह राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने सेशेल्स नेशनल बॉटनिकल गार्डन का भी दौरा किया, जहां उनकी मुलाकात दुनिया के सबसे उम्रदराज़ जीवित स्थलीय जीव जोनाथन से हुई. यह मुलाकात आकर्षण का केंद्र बनी और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ एक विशेष प्रतीक के रूप में सामने आई.

दुनिया के सबसे बुजुर्ग कछुए से मुलाकात

सेशेल्स नेशनल बॉटनिकल गार्डन में प्रधानमंत्री मोदी ने जोनाथन नामक विशाल कछुए को देखा और उसके बारे में जानकारी प्राप्त की. जोनाथन को दुनिया का सबसे अधिक उम्र वाला जीवित स्थलीय प्राणी माना जाता है. अनुमान है कि उसका जन्म वर्ष 1832 में हुआ था और उसकी आयु लगभग 194 वर्ष है. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स भी उसे इस उपलब्धि के लिए मान्यता दे चुका है. लगभग दो सदियों के जीवनकाल में उसने दुनिया के अनेक ऐतिहासिक दौर देखे हैं, जिससे वह केवल एक जीव नहीं बल्कि इतिहास का जीवंत साक्षी भी माना जाता है.

उम्र के बावजूद स्वस्थ है जोनाथन

इतनी अधिक उम्र होने के बावजूद जोनाथन आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. विशेषज्ञों के अनुसार उसकी नियमित देखभाल और पशु चिकित्सकों की निगरानी ने उसे स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. हालांकि उसकी दृष्टि मोतियाबिंद के कारण कमजोर हो चुकी है और सूंघने की क्षमता भी पहले जैसी नहीं रही, फिर भी वह सक्रिय जीवन जी रहा है. सेशेल्स आने वाले पर्यटकों के लिए जोनाथन एक खास आकर्षण माना जाता है और बड़ी संख्या में लोग उसे देखने पहुंचते हैं.

पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बॉटनिकल गार्डन परिसर में एक पौधा भी लगाया. यह कदम पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है. वृक्षारोपण कार्यक्रम के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया. सेशेल्स जैसे द्वीपीय देश के लिए पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं इसलिए यह पहल दोनों देशों के साझा दृष्टिकोण को भी दर्शाती है.

भारत-सेशेल्स संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और सेशेल्स के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेने के साथ-साथ वह सेशेल्स के नेतृत्व के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे. समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, जलवायु लचीलापन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा. दोनों देशों के बीच 50 वर्षों पुराने राजनयिक संबंधों के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर यह यात्रा भविष्य की साझेदारी के लिए नई संभावनाएं खोलने वाली मानी जा रही है.