आधार कार्ड, वोटर आईडी ना पासपोर्ट, तो फिर क्या है भारत में नागरिकता का प्रमाण? सरकार ने बताया

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है. इस बयान के बाद नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है.

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Kuldeep Sharma

पासपोर्ट को आमतौर पर पहचान और नागरिकता से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विदेश मंत्रालय की हालिया टिप्पणी ने इस धारणा को नया आयाम दिया है. मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है और इसे नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता. इस स्पष्टीकरण के बाद लोगों के बीच यह सवाल फिर से उठने लगा है कि आखिर भारतीय नागरिकता स्थापित करने के लिए कौन से दस्तावेज और नियम महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

पासपोर्ट पर विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण

14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट का मूल उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना है. मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन इसका होना अपने आप में नागरिकता का अंतिम और कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता. पासपोर्ट पर यह भी उल्लेख होता है कि यह भारत सरकार की संपत्ति है और आवश्यकता पड़ने पर इसे सरकार को लौटाना होगा. मंत्रालय के इस बयान ने नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों पर नई बहस को जन्म दिया है.

आधार और वोटर आईडी की क्या है स्थिति

नागरिकता को लेकर चर्चा के दौरान आधार और मतदाता पहचान पत्र का भी अक्सर जिक्र होता है. हालांकि, विभिन्न कानूनी मंचों पर यह स्पष्ट किया गया है कि आधार कार्ड मुख्य रूप से पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं. इसी तरह वोटर आईडी चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने और निवास संबंधी जानकारी के लिए उपयोगी है, लेकिन इसे भी नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाता. यही कारण है कि नागरिकता के मामलों में केवल इन दस्तावेजों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाता.


जन्म के आधार पर नागरिकता के नियम

भारतीय नागरिकता कानून के तहत अलग-अलग समय अवधि में जन्मे लोगों के लिए अलग प्रावधान लागू होते हैं. 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्म लेने वाले लोग जन्म से नागरिक माने जाते हैं. 1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे व्यक्ति के लिए कम से कम एक माता या पिता का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है. वहीं 3 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे लोगों के लिए दोनों माता-पिता का भारतीय नागरिक होना या एक माता-पिता का नागरिक होना और दूसरा अवैध प्रवासी न होना जरूरी है.

पासपोर्ट सेवाओं का तेजी से विस्तार

विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवाओं में हुए विस्तार की जानकारी भी साझा की. मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में करीब 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें 1.39 करोड़ पासपोर्ट शामिल हैं. पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज हुई है और अधिकांश मामलों में पुलिस सत्यापन को छोड़कर छह कार्य दिवसों के भीतर पासपोर्ट उपलब्ध कराया जा रहा है. देशभर में पासपोर्ट सेवा केंद्रों की संख्या बढ़कर 545 हो गई है, जबकि चिप आधारित ई-पासपोर्ट की शुरुआत की दिशा में भी काम जारी है.