शीतकालीन सत्र 2025 में आएंगे 14 बिल, जानें क्या है मोदी सरकार की प्लानिंग?
शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू होगा और सरकार 14 बिल पास कराना चाहती है. विपक्ष एसआईआर प्रक्रिया, नई एफआईआर, दिल्ली धमाके और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है.
नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार यानी आज से शुरू हो रहा है और यह 19 दिसंबर तक चलेगा. इस दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कड़े टकराव के आसार हैं. विपक्ष ने एसआईआर प्रक्रिया, नेशनल हेराल्ड मामले में नई एफआईआर, दिल्ली आत्मघाती धमाके और प्रदूषण संकट को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है.
वहीं सरकार ने दिवाला कानून, बीमा, सिक्योरिटीज मार्केट, कॉर्पोरेट कानून, राष्ट्रीय राजमार्ग, उच्च शिक्षा आयोग, एटॉमिक एनर्जी, जीएसटी और सुरक्षा से जुड़े सेस बिल समेत 14 अहम विधेयक पास कराने का लक्ष्य तय किया है.
शीतकालीन सत्र में कितनी बैठकें होंगी?
शीतकालीन सत्र में कुल 15 बैठकें होंगी जिनमें सरकार सुधार से जुड़े कई विधेयक पेश करेगी. सरकार का कहना है कि वह विपक्ष की बात सुनने को तैयार है और संसद को सुचारू रूप से चलाने की पूरी कोशिश करेगी. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हर मुद्दे पर चर्चा के लिए नियम और परंपरा का पालन किया जाएगा.
किन मुद्दों को उठाएगा विपक्ष?
विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह एसआईआर प्रक्रिया को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाएगा. देश के 12 राज्यों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष सरकार पर हमला तेज कर चुका है. कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी और डीएमके सहित कई दलों ने आरोप लगाया है कि एसआईआर के बहाने गरीब, दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों को वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश की जा रही है.
कांग्रेस की क्या है रणनीति?
कांग्रेस की रणनीति बैठक में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सदन में सख्त रुख अपनाने को कहा. राहुल गांधी ने बीएलओ की आत्महत्या और दिल्ली में हुए आतंकी हमले को भी गंभीर चूक बताते हुए इसे संसद में उठाने की बात कही.
विपक्ष वायु प्रदूषण, किसानों की स्थिति, महंगाई, बेरोजगारी और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर भी बहस कराना चाहता है. दिल्ली में आतंकी हमले और राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति को लेकर भी विपक्ष सरकार पर दबाव बनाए रखने की तैयारी में है.
क्या है नेशनल सॉन्ग का मुद्दा उठाने की वजह?
सरकार का एक महत्वपूर्ण एजेंडा 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा कराना है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कांग्रेस ने 1937 में गीत की कई पंक्तियां हटाकर विभाजन की नींव रखी थी. इस कारण इस मुद्दे पर भी बहस तेज होने की संभावना है.
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती क्योंकि यह चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही इसे लागू किया गया है. ऐसे में सत्र के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव तय माना जा रहा है.