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आतंकवाद के आकाओं पर कोई रहम नहीं! 'पाकिस्तान हो जाओ सावधान', भारत के साथ अरब देशों ने भी मिलाया हाथ

अरब के साथ मिलकर भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के ऊंचे सुर लगाए हैं. अरब देशों के साथ दूसरी बैठक के बाद भारत ने 'दिल्ली घोषणापत्र' जारी किया है.

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Shanu Sharma

नई दिल्ली: भारत ने अरब देशों के साथ दूसरी बैठक के बाद 'दिल्ली घोषणापत्र' जारी की है. इस घोषणापत्र से पाकिस्तान की मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि इसमें आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है. आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ कदम से कदम मिलाते हुए आंतकवाद को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है. 

भारत के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के खिलाफ अरब देशों ने भी तीखी भर्त्सना की है. सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों ने अपने सुर ऊंचे करते हुए घोषणा पत्र जारी किया है, जिसमें किसी भी तरीके के आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराया गया है. 

दिल्ली घोषणापत्र में क्या है?

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने मासूम पर्यटकों को निशाना बनाया था. हालांकि इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब दिया. लेकिन उससे पहले 22 परिवारों को हुए नुकसान का भरपाई कोई नहीं कर सकता है. ऐसे में पीएम मोदी ने अरब देशों के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ जीरी टॉलरेंस नीति को मजबूती दी है. यह संदेश पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी है. जिसमें साफ शब्दों में कहा गया है कि आंतकवाद को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस घोषणापत्र में देशों से यह भी अपील की गई है कि वह अपने धरती पर किसी भी आतंकी ढ़ांचे और नेटवर्क को पनपने ना दें. साथ ही इन देशों ने यह भी अपील की है कि आतंकवादियों तक ड्रोन और हाई टेक हथियार ना पहुंचने दे. 

इजरायल-गाजा युद्ध पर क्या है भारत का रुख?

अरब के 19 देशों के साथ भारत ने घोषणापत्र जारी करते हुए आतंकवाद के खिलाफ सीरिया-इराक के प्रयासों को सराहा है. इसके अलावा आतंकवाद के आकाओं की रीढ़ की हड्डी तोड़ने के लिए सुरक्षा परिषद द्वारा Algeria Guiding Principles को सर्वसम्मति से अपनाने के फैसले का स्वागत किया गया. इस घोषणा पत्र में फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी बात की गई है. जिसमें भारत और अरब के देशों ने फिलिस्तीन राष्ट्र की मांग पर अपना समर्थन देते हुए इजरायल से शांतिपूर्ण तरीके के समझौते की मांग की गई है. वहीं इस युद्ध में मध्यस्थता के लिए मिस्त्र, कतर और अमेरिका की सराहना भी गई है. साथ ही गाजा के पुननिर्माण को बेहद जरूरी बताया है.