'सरकारी भाषण है, इमरजेंसी पर बोलने का कोई मतलब नहीं था...', राष्ट्रपति के अभिभाषण पर उबल पड़ा विपक्ष
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज यानी गुरुवार को संसद के दोनों सदनों (राज्य सभा और लोक सभा) को संयुक्त रूप से संबोधित किया. उनके संबोधन को विपक्ष ने सरकारी भाषण बताया और अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी. विपक्ष ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपने भाषण में इमरजेंसी पर नहीं बोलना चाहिए थे. इसके अलावा, अन्य मुद्दों को लेकर भी विपक्ष ने राष्ट्रपति मुर्मू के अभिभाषण पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
Opposition On President Murmu Speech: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदन के संयुक्त सत्र के दौरान अपने अभिभाषण में मोदी सरकार की कामयाबियों को बताया और भविष्य में होने वाले कामों के बारे में भी बताया. उन्होंने मोदी सरकार की 10 साल की सरकार की उपलब्धियों को गिनाया. साथ ही लोकसभा चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे सांसदों को बधाई भी दी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर विपक्ष ने अपनी प्रतिक्रिया दी और इसे सरकार भाषण बताया. आइए, जानते हैं कि विपक्ष के किस नेता ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर क्या-क्या कहा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि 49 साल बाद संबोधन में आपातकाल की बात करने का कोई औचित्य नहीं था. उन्हें आज के मुद्दों पर बोलना चाहिए था. हमने NEET परीक्षा या बेरोजगारी के बारे में कुछ नहीं सुना... मणिपुर शब्द राष्ट्रपति मुर्मू या पीएम मोदी के मुंह से नहीं निकला। भारत-चीन सीमा जैसे मुद्दों को संबोधन में उठाया जाना चाहिए था.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में क्या-क्या कहा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक ( नीट यूजी-2024 ) समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का जिक्र किया और वादा किया कि उनकी सरकार आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगी. उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी.
उन्होंने कहा कि मेरी सरकार निष्पक्ष जांच कराने तथा हाल ही में कुछ परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने के दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है. हमने पहले भी विभिन्न राज्यों में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं देखी हैं, इसलिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देशव्यापी स्तर पर कड़े कदम उठाने की जरूरत है. संसद ने भी परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ कड़ा कानून बनाया है. उन्होंने कहा कि सभी सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षाओं के लिए शुचिता और पारदर्शिता अनिवार्य है.
राष्ट्रपति ने 1975 में आपातकाल लगाने जाने के बारे में भी की बात
राष्ट्रपति मुर्मू ने 1975 में आपातकाल लगाए जाने के विवादास्पद विषय पर भी बात की और कहा कि दो साल की वह अवधि संविधान पर सीधे हमले का सबसे बड़ा और सबसे काला अध्याय था. अपने संबोधन से कुछ समय पहले, राष्ट्रपति का संसद भवन में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वागत किया.
राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार देश के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने में सक्षम बनाने के लिए माहौल बनाने के लिए काम कर रही है. उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश परीक्षाओं में बाधा उत्पन्न होती है तो यह उचित नहीं है. सरकारी भर्तियों और परीक्षाओं में शुचिता और पारदर्शिता बहुत जरूरी है.
राष्ट्रपति मुर्मू ने संसद के सभी सदस्यों को सलाह दी कि वे सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए संसदीय कार्यवाही में बाधा न डालें. उन्होंने कहा कि नीतियों का विरोध करना संसद की कार्यवाही में बाधा डालने से अलग है. सभी सदस्यों के लिए जनता का हित सर्वोपरि होना चाहिए. उन्होंने घोषणा की कि सरकार आगामी बजट के दौरान कई बड़ी घोषणाएं करेगी.
राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं- बजट में बड़े आर्थिक और सामाजिक फैसले होंगे
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि बजट में बड़े आर्थिक और सामाजिक फैसले होंगे और कई ऐतिहासिक कदम उठाए जाएंगे. लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सुधारों की गति बढ़ाई जाएगी. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का मानना है कि निवेश के लिए राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए. उन्होंने कहा, "भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. पिछले 10 वर्षों में औसतन 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, हालांकि ये सामान्य समय नहीं था.
उन्होंने कहा कि ये विकास दर वैश्विक महामारी और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्षों के बावजूद हासिल की गई है. यह पिछले 10 वर्षों के सुधारों का परिणाम है. भारत अकेले वैश्विक विकास में 15 प्रतिशत का योगदान दे रहा है. मेरी सरकार भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए काम कर रही है.
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