उर्दू के जाने-माने शायर मुनव्वर राणा का लंबी बीमारी के बाद 71 साल की उम्र में निधन
Munawwar Rana died: मशहूर उर्दू शायर मुन्नवर राणा का लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में 71 साल की उम्र में निधन हो गया. वे पिछले कई महीनों से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज पीजीआई अस्पताल में ही चल रहा था.
Munawwar Rana died: मशहूर उर्दू शायर मुन्नवर राणा का लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में 71 साल की उम्र में निधन हो गया. वे पिछले कई महीनों से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज पीजीआई अस्पताल में ही चल रहा था. उन्हें पहले से किडनी और दिल की बीमारी थी.
राणा ने रविवार को देर रात साढ़े 11 बजे के आसपास अंतिम सांस ली. वे इस हॉस्पिटल में आईसीयू वार्ड में भर्ती थे.
काफी समय से खराब थी तबीयत
मुनव्वर राणा की तबीयत पिछले कुछ दिनों से काफी खराब थी. पिछले साल मई में भी उनका डायलिसिस हुआ था और उस दौरान उनके पेट में दर्द था. दर्द के बाद डॉक्टर ने उनको अस्पताल में भर्ती किया. जांच के दौरान उनके गाल ब्लैडर में समस्याएं सामने आई थी. यह समस्याएं सर्जरी के बाद भी बनी रही. तब उनकी बेटी ने जानकारी दी थी कि उनके पिता की तबीयत पिछले दो या तीन दिन से खराब चल रही है.
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वेंटिलेटर पर कटा जिंदगी का अंतिम सफर
वे इसके बाद भी काफी समय तक वेंटिलेटर पर रहे. ब्लड प्रेशर, शुगर और किडनी के वह मरीज हो चुके थे. उनको साल 2017 में भी सीने में दर्द की शिकायत हुई थी. फेफड़े और गली में इन्फेक्शन भी हो गया था. इसके अलावा दोनों दोनों घुटने का भी ऑपरेशन हो चुका था. कुल मिलाकर उनका पूरा शरीर उनके साथ छोड़ रहा था.
रायबरेली में जन्म
मुनव्वर राणा का जन्म 26 नवंबर 1952 को भारत के रायबरेली में हुआ था जो उत्तर प्रदेश में पड़ता है. अपनी खूबसूरत रचनाओं से अपनी कविताओं से लोगों के दिलों में उतरने वाले मुनव्वर राणा के इस निधन के बाद रचनात्मक जगत में शोक की लहर दौड़ दौड़ गई है.
बेबाकी के लिए विवादों में भी रहे
कविता जगत के फैंस और मुनव्वर राणा के फॉलोअर्स का मानना है कि मुनव्वर की विरासत केवल उनकी कविताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जिस चीज में उनका विश्वास था, उसको लेकर बोलने का साहस भी उन्होंने दिखाया. भले इसके लिए उनको किसी भी कीमत का सामना करना पड़ा.
मुनव्वर राणा कई बार अपनी बेबाकी के चलते विवादों में भी रहे. उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर भी बोला था कि 2022 में यूपी में अगर फिर से योगी आदित्यनाथ आते हैं तो भी उत्तर प्रदेश छोड़ देंगे वह दिल्ली या कोलकाता चले जायेंगे. उनके पिता ने पाकिस्तान जाना मंजूर नहीं किया था लेकिन वह अपने शहर, अपने प्रदेश, अपनी मिट्टी को छोड़ देंगे.