BMC समेत महाराष्ट्र नगर नगम चुनाव की तारीखों का हुआ ऐलान, एक क्लिक में जानें वोटिंग से लेकर काउंटिंग तक की सारी जानकारी
महाराष्ट्र में लंबित नगर निकाय चुनाव 15 जनवरी को होंगे और 16 जनवरी को नतीजे आएंगे. बीएमसी चुनाव सबसे अहम माने जा रहे हैं, जहां सत्ता की दिशा और दलों की ताकत तय होगी.
मुंबई: महाराष्ट्र में 2022 से लंबित पड़े नगर निकाय चुनावों की तारीख आखिरकार तय हो गई है. 15 जनवरी को राज्यभर में मतदान होगा और 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे.
इन चुनावों में 29 नगर निगम, 32 जिला परिषद और 336 पंचायत समितियां शामिल हैं. खासतौर पर मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी का चुनाव राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर सीधे राज्य की राजनीति पर पड़ेगा.
बीएमसी चुनाव क्यों हैं सबसे अहम
बीएमसी देश की सबसे बड़ी और एशिया की सबसे अमीर नगर निगम है. इसका बजट कई छोटे राज्यों के सालाना बजट से भी ज्यादा है. राजनीतिक रूप से यह चुनाव सत्ता की दिशा तय करने वाला माना जाता है. अब तक अविभाजित शिवसेना के नियंत्रण में रही बीएमसी पर इस बार कई दलों की नजर है, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है.
बीजेपी और शिंदे गुट की रणनीति
इस बार भारतीय जनता पार्टी की कोशिश है कि वह मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ मिलकर बीएमसी की सत्ता अपने हाथ में ले. मेयर पद को लेकर पूछे गए सवाल पर शिंदे ने सावधानी से कहा है कि मेयर महायुति से ही होगा. इससे साफ है कि सत्तारूढ़ गठबंधन बीएमसी को लेकर पूरी तरह आक्रामक रणनीति अपनाए हुए है.
विपक्ष के लिए निर्णायक परीक्षा
महाविकास आघाड़ी भी इन चुनावों को लेकर पूरी तरह मैदान में है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के लिए यह चुनाव बेहद अहम माने जा रहे हैं. पिछले विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन को देखते हुए यह मुकाबला इनके राजनीतिक भविष्य की दिशा तय कर सकता है. बीएमसी में जीत विपक्ष को नई ऊर्जा दे सकती है.
ठाकरे भाइयों की संभावित एकजुटता
इन चुनावों ने एक और दिलचस्प मोड़ ले लिया है. दशकों बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के साथ आने की चर्चाएं तेज हैं. हालांकि, दोनों के एक साथ चुनाव लड़ने का औपचारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है. यदि ऐसा होता है, तो मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
देरी की वजह और सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा
मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे बड़े शहरों के नगर निगम चुनाव 2022 से लंबित थे. इसकी वजह ओबीसी आरक्षण और वार्ड परिसीमन से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक विवाद रहे. सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित चुनाव 31 जनवरी तक पूरे करने की समयसीमा तय की है. इससे पहले 2 दिसंबर को 264 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में मतदान हुआ, जिनके नतीजे 21 दिसंबर को आएंगे.
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