18 महीने में 4 करोड़ का बिल, बेटे को जिंदा रखने के लिए सब कुछ बेच चुके मां-बाप; जानें हरीश राणा जैसा एक और मामला
मुंबई में एक परिवार अपने बेटे को जिंदा रखने के लिए 4 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है. 2023 के हादसे के बाद से युवक वेजिटेटिव स्टेट में है, जबकि बीमा क्लेम खारिज होने और घर टूटने से परिवार आर्थिक संकट में है.
मुंबई: हरीश राणा के फैसले ने उन मरीजों की तरफ पूरे देश का ध्यान खींचा जो जिंदगी और मौत के बीच फंसे हुए हैं. महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से एक बेहद भावुक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक परिवार अपने बेटे को जिंदा रखने के लिए पिछले ढाई साल से संघर्ष कर रहा है. 35 वर्षीय आनंद दीक्षित 2023 में हुए एक सड़क हादसे के बाद से पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में हैं, यानी उनका शरीर जिंदा है लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं है.
यह हादसा 29 दिसंबर 2023 को गोरखपुर में हुआ था, जब आनंद अपनी नई स्कूटर चला रहे थे. दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि उन्हें गहरी मस्तिष्क चोट लगी और तब से वे मशीनों के सहारे सांस ले रहे हैं और ट्यूब के जरिए भोजन दिया जा रहा है.
डाक्टरों ने क्या बताया है?
पिछले 18 महीनों से उनका देखभाल करने वाले केयरटेकर को एक छोटी सी प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है. डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है.
अब तक कितना हो चुका है खर्च?
परिवार ने बेटे को जिंदा रखने के लिए अब तक 4 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए हैं. इलाज के लिए उन्होंने अपनी जमीन और सारी बचत बेच दी है. हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें कर्ज भी लेना पड़ा. इस बीच, जब परिवार अस्पतालों में बेटे के इलाज में जुटा था, उसी दौरान Brihanmumbai Municipal Corporation ने उनका घर तोड़ दिया, जिसके बाद उन्हें किराए के घर में रहना पड़ रहा है.
कैसी है परिवार की स्थिति?
आनंद के पिता ने कहा कि उन्हें हर कदम पर आर्थिक रूप से नुकसान झेलना पड़ा. उन्होंने बताया कि अस्पताल के भारी बिलों के बाद बीमा कंपनी Care Health Insurance ने उनका क्लेम भी खारिज कर दिया, जिससे उन पर करीब 50 लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ आ गया.
उन्होंने कहा कि वह सब कुछ बेच चुके हैं, बस एक बार अपने बेटे को ‘पापा’ कहते सुनना चाहते हैं. वहीं मां आज भी बेटे के चमत्कार का इंतजार कर रही हैं और हर दिन उसकी घड़ी और फोन संभालकर रखती हैं.
यह मामला देश में पहले सामने आए हरीश राणा इच्छामृत्यु के मामले की याद दिलाता है, जिसमें लंबे समय तक वेजिटेटिव स्टेट में रहने के बाद इच्छामृत्यु की अनुमति दी गई थी. हालांकि आनंद का परिवार अब भी उम्मीद नहीं छोड़ना चाहता.
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