डिलीवरी बॉय बने सांसद राघव चड्ढा, Blinkit की जैकट पहकर पहुंचाए पार्सल
आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्क की हकीकत को समझने के लिए ब्लिंकइट के डिलीवरी पार्टनर की भूमिका निभाई.
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा Blinkit के डिलीवरी बॉय बनकर सड़कों पर निकले. उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वो अपनी लाइन से अलग हटकर डिलीवरी पार्टनर के अंदाज में नजर आ रहे हैं.
X पर कई पोस्ट के माध्यम से गिग वर्कर्स का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने के बाद, आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने उनकी चुनौतियों को प्रत्यक्ष रूप से समझने के लिए खुद उनके साथ रहकर अपना समर्थन एक कदम और आगे बढ़ाया है. जमीनी स्तर पर जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से, चड्ढा को ब्लिंकइट डिलीवरी यूनिफॉर्म पहने और एक डिलीवरी पार्टनर के साथ ग्राहकों के ऑर्डर पूरे करते हुए देखा गया.
ब्लिंकइट डिलीवरी बाइक पर पीछे बैठकर निकले राघन चड्ढा
X पर एक छोटा सा टीज़र साझा करते हुए, चड्ढा ने लिखा, “बोर्डरूम से दूर, जमीनी स्तर पर. मैंने उनका दिन जिया. देखते रहिए!” हालांकि पूरा वीडियो अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन ऑनलाइन प्रसारित हो रहे क्लिप में राज्यसभा सांसद को ब्लिंकइट डिलीवरी बाइक पर पीछे बैठकर कई घरों में किराने का सामान पहुंचाते हुए दिखाया गया है, जो एक गिग वर्कर के जीवन के एक आम दिन को दर्शाता है.
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यह पहल चड्ढा की हाल ही में गिग वर्कर्स के साथ हुई बातचीत के बाद शुरू की गई है, जिसमें उन्होंने लंबे कार्य घंटों वेतन संरचना और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा की. उन्होंने पूरे भारत में डिलीवरी पार्टनर्स और ऐप-आधारित वर्कर्स के लिए मजबूत सुरक्षा जाल, बेहतर कामकाजी परिस्थितियों और उच्च वेतन की बार-बार मांग की है.
गिग वर्कर्स की समस्याओं को लेकर कर चुके हैं चर्चा
गिग वर्क को लेकर चल रही बहस के बीच, चड्ढा ने ज़ोमैटो के संस्थापक और सीईओ दीपेंद्र गोयल पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा है . गोयल के यूट्यूबर राज शामानी के साथ पॉडकास्ट में शामिल होने का वीडियो वायरल होने के बाद, चड्ढा ने कंपनी द्वारा श्रमिकों की चिंताओं पर दी गई प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए X पर लिखा, “गिग वर्कर्स के साथ सिर्फ बातचीत की जरूरत थी. इसके बजाय पैसे लेकर किए गए ट्वीट, व्यक्तिगत हमले और एक पॉडकास्ट का सहारा लिया गया.”
यह बातचीत दिसंबर के अंत में ध्यान आकर्षित करने वाली गिग वर्कर्स की हड़ताल की पृष्ठभूमि में हुई है. उस समय हुए विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने तर्क दिया था कि यह व्यवस्था मूल रूप से अन्यायपूर्ण नहीं है, क्योंकि यह बड़ी संख्या में कर्मचारियों को आकर्षित और बनाए रखने में सक्षम है. उन्होंने कहा, "यदि कोई व्यवस्था मूल रूप से अन्यायपूर्ण होती, तो वह लगातार इतने सारे लोगों को आकर्षित और बनाए नहीं रख पाती जो इसमें काम करना चुनते हैं, उन्होंने निहित स्वार्थों से प्रेरित बयानों के प्रति आगाह किया.