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13 साल से चल रहा मेडिकल कॉलेज, एक भी स्टूडेंट नहीं हो पाया ग्रेजुएट, क्या है इसकी कहानी

चिंतपूर्णी कॉलेज और कर्नाटक कॉलेज दोनों ही उन नौ मेडिकल कॉलेजों में शामिल हैं, जिन्हें एनएमसी ने 2023-24 बैच के लिए छात्रों के एडमिशन लेने से रोक दिया. इसके पीछे कॉलेज में फैकल्टी की कमी समेत कई कारण बताए गए. पूरा अस्पताल खाली पड़ा है. यहां मरीजों का फ्लो न के बराबर है.

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जनरल वार्ड में ताले लगे हैं, ज्यादातर बेड खाली हैं, कोई ब्लड बैंक नहीं, कोई सर्जरी नहींऔर कोई डिलीवरी नहीं हुई है. यह द वाइट मेडिकल कॉलेज है, जो पंजाब के पठानकोट शहर में 150 सीटों वाला एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज है. इस कॉलेज को 2011 में बनाया गया था लेकिन अब विरान पड़ा हुआ है. इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है. अभी तक यहां से पढ़कर एक भी बैच नहीं निकला है. एक भी स्टूडेंट ग्रेजुएट नहीं हो पाया है. 

इस साल की शुरुआत में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद, देश के सर्वोच्च चिकित्सा शिक्षा नियामक, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने सभी छात्रों को कॉलेज से बाहर निकालने के लिए कहा. यह कॉलेज देश के उन दो कॉलेजों में से एक है जिसे अदालतों ने एमबीबीएस छात्रों के पूरे बैच को उनके घटिया बुनियादी ढांचे और कई मापदंडों पर प्रदर्शन को देखते हुए स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है. दस्तावेजों से पता चलता है कि चिंतपूर्णी कॉलेज बार-बार गलती करता रहा है.

चिंतपूर्णी कॉलेज को बंद करने का प्रस्ताव  

दरअसल, एनएमसी ने पहले भी कॉलेज को नए दाखिले लेने से रोक दिया है. 2011 में अपनी स्थापना के बाद से कॉलेज को केवल पांच  2011, 2014, 2016, 2021 और 2022 में नए बैच लेने की अनुमति दी गई है. 2017 में कॉलेज से छात्रों के बाहर निकलने और नए दाखिलों पर रोक को देखते हुए, वर्तमान में केवल दो बैच (2021 और 2022 में दाखिला लेने वाले) ही कैंपस में हैं. इन छात्रों ने अब कॉलेज से बाहर निकाले जाने की मांग करते हुए कोर्ट का रुख किया है. पिछले साल एक कमीटी ने जांच के बाद चिंतपूर्णी कॉलेज को बंद करने का प्रस्ताव  दिया था. 

स्टूडेंट्स के एडमिशन पर रोक

पिछले साल अगस्त में चिंतपूर्णी कॉलेज और कर्नाटक कॉलेज दोनों ही उन नौ मेडिकल कॉलेजों में शामिल हैं, जिन्हें एनएमसी ने 2023-24 बैच के लिए छात्रों के एडमिशन लेने से रोक लगा दिया. इसके पीछे कॉलेज में फैकल्टी की कमी समेत कई कारण बताए गए. कॉलेज जरजर स्थिति में हैं. पूरा अस्पताल खाली पड़ा है. एनएमसी के मानदंडों के अनुसार, 150 बिस्तरों वाले मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अपनी स्थापना के तीसरे वर्ष में प्रतिदिन कम से कम 750 मरीज आने चाहिए.

न फैकल्टी और न  ब्लड बैंक

मई 2023 के जांच में भी पाया गया कि यहां कोई सर्जरी या प्रसव नहीं हुआ. निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कॉलेज के पास ब्लड बैंक का लाइसेंस नहीं है. कॉलेज में 54% से अधिक फैकल्टी और 64% रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी है. एनएमसी द्वारा ऑनलाइन उपस्थिति के आकलन में पाया गया कि फैकल्टी में 96.9% और रेजिडेंट डॉक्टरों में 100% की कमी है.