ममता बनर्जी ने ED की रेड को रोका, I-PAC अधिकारी का फोन जब्त किया: सूत्र
ममता बनर्जी ने ED की रेड में रुकावट डाली. इसके साथ ही I-PAC अधिकारी का फोन छीनकर उसे पास रख लिया. इसके अलावा पुलिस ने अधिकारियों को गिरफ्तारी की धमकी भी दी.
नई दिल्ली: गुरुवार को कोलकाता में एक बड़ा विवाद हुआ, जब प्रवर्तन निदेशालय ने एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म, इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के ऑफिस पर छापा मारा. सूत्रों के अनुसार, इस रेड के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौक पर पहुंचकर ऑपरेशन को रोक दिया. ED की यह रेड मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी चल रही जांच का हिस्सा थी. जब रेड चल रही थी, तो I-PAC के परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई.
सूत्रों के अनुसार, जब ED अधिकारी अपना काम कर रहे थे, तब ममता बनर्जी मौके पर पहुंच गईं. बताया तो यह भी गया है कि ममता बनर्जी ने I-PAC के एक अधिकारी प्रतीक जैन का मोबाइल फोन ले लिया. यह स्थिति तब और ज्यादा गंभीर हो गई, जब सीनियर पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे.
पश्चिम बंगला के DGP ने दी ED अधिकारियों को धमकी:
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के पुलिस DGP भी मौके पर पहुंचे. इन्होंने ED अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि वो रेड से मिली किसी भी चीज को अपनी ऑफिशियल रिपोर्ट में रिकॉर्ड न करें. बताया जा रहा है कि DGP ने ED अधिकारियों को चेतावनी देते हुए यह भी कहा है कि अगर उन्होंने रेड से कुछ भी बरामदगी दिखाई, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है. वहां सिर्फ तीन ED अधिकारी मौजूद थे, जबकि दर्जनों पुलिसकर्मी और मुख्यमंत्री की Z-कैटेगरी सुरक्षा स्टाफ ने इलाके को घेर रखा था. इतनी बड़ी संख्या में पुलिस की मौजूदगी के चलते ED अधिकारी खुद को दवाब में महसूस कर रहे थे.
FIR दर्ज करने की भी मिली धमकी:
अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्हें अपने ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स में रेड के दौरान हुई घटनाओं का ब्योरा बदलने या छिपाने के लिए मजबूर किया गया. यह भी आरोप है कि DGP ने ED टीम को यह भी चेतावनी दी कि अगर उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उनके खिलाफ फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाएगी और उन्हें हिरासत में ले लिया जाएगा. इससे केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों पर दबाव और बढ़ गया.
ED ने कहा है कि ऑपरेशन के दौरान उनके अधिकारियों को धमकी दी गई. साथ ही ऑफिशियल रिकॉर्ड में बदलाव करने के लिए मजबूर किया गया. इसके चलते वो अपना काम ठीक से नहीं कर पाए. एजेंसी का मानना है कि इस दखलअंदाजी ने उनकी जांच में गंभीर बाधा डाली.